Tag: Anticipating Death

Suryakant Tripathi Nirala

मैं अकेला

मैं अकेला; देखता हूँ, आ रही मेरे दिवस की सान्ध्य बेला। पके आधे बाल मेरे हुए निष्प्रभ गाल मेरे, चाल मेरी मन्द होती आ रही, हट रहा मेला। जानता हूँ, नदी-झरने जो...
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