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Girija Kumar Mathur

दो पाटों की दुनिया

चारों तरफ़ शोर है चारों तरफ़ भरा-पूरा है चारों तरफ़ मुर्दनी है भीड़ और कूड़ा है हर सुविधा एक ठप्पेदार अजनबी उगाती है, हर व्यस्तता और अधिक अकेला कर जाती है। हम...
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