कहानी | Story

कहानी: ‘रेल की रात’ – इलाचंद्र जोशी

‘रेल की रात’ – इलाचंद्र जोशी गाड़ी आने के समय से बहुत पहले ही महेंद्र स्टेशन पर जा पहुँचा था। गाड़ी के पहुँचने का ठीक समय मालूम न हो, यह बात नहीं कही जा सकती। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘भेड़िये’ – भुवनेश्वर

‘भेड़िये’ – भुवनेश्वर ‘भेड़िया क्या है’, खारू बंजारे ने कहा, ‘मैं अकेला पनेठी से एक भेड़िया मार सकता हूँ।’.. मैंने उसका विश्वास कर लिया। खारू किसी चीज से नहीं डर सकता और हालाँकि 70 के Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना’ – अमृता प्रीतम

‘एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना’ – अमृता प्रीतम ‘पालक एक आने गठ्ठी, टमाटर छह आने रत्तल और हरी मिर्चें एक आने की ढेरी’, पता नहीं तरकारी बेचनेवाली स्त्री का मुख कैसा था कि मुझे Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘ग्राम’ – जयशंकर प्रसाद

‘ग्राम’ – जयशंकर प्रसाद टन! टन! टन! स्टेशन पर घंटी बोली। श्रावण-मास की संध्या भी कैसी मनोहारिणी होती है! मेघ-माला-विभूषित गगन की छाया सघन रसाल-कानन में पड़ रही है। अंधियारी धीरे -धीरे अपना अधिकार पूर्व-गगन Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘आहुति’ – प्रेमचंद

‘आहुति’ – प्रेमचंद आनन्द ने गद्देदार कुर्सी पर बैठकर सिगार जलाते हुए कहा- आज विशम्भर ने कैसी हिमाकत की! इम्तहान करीब है और आप आज वालण्टियर बन बैठे। कहीं पकड़ गये, तो इम्तहान से हाथ Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘आजादी: एक पत्र’ – भुवनेश्वर

कहानी: ‘आजादी: एक पत्र’ – भुवनेश्वर वही मार्च का महीना फिर आ गया। आज शायद वही तारीख भी हो। पर मेरे लिखने का सबब इतना निकम्मा नहीं है। असल में प्यारे दोस्त, इस एक साल Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

‘कहानी का प्लॉट’ – शिवपूजन सहाय

‘कहानी का प्लॉट’ – शिवपूजन सहाय मैं कहानी-लेखक नहीं हूँ। कहानी लिखने-योग्य प्रतिभा भी मुझ में नहीं है। कहानी-लेखक को स्वभावतः कला-मर्मज्ञ होना चाहिये, और मैं साधारण कलाविद् भी नहीं हूँ। किंतु कुशल कहानी-लेखकों के Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

‘एक चिंगारी घर को जला देती है’ – तोल्सतोय

‘एक चिंगारी घर को जला देती है’ – तोल्सतोय अनुवाद: प्रेमचंद एक समय एक गांव में रहीम खां नामक एक मालदार किसान रहता था। उसके तीन पुत्र थे, सब युवक और काम करने में चतुर Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कफ़न’ – प्रेमचंद

‘कफ़न’ – प्रेमचंद झोपड़े के द्वार पर बाप और बेटा दोनों एक बुझे हुए अलाव के सामने चुपचाप बैठे हुए हैं और अन्दर बेटे की जवान बीबी बुधिया प्रसव-वेदना में पछाड़ खा रही थी। रह-रहकर Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘आदमी और कुत्ता’ – वनमाली

‘आदमी और कुत्ता’ – वनमाली मैं आपके सामने अपने एक रेल के सफर का बयान पेश कर रहा हूँ। यह बयान इसीलिए है कि सफर में मेरे साथ जो घटना घटी उसका कभी आप अपने Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह 

‘कानों में कँगना’ – राजा राधिकारमण प्रसाद सिंह  “किरन! तुम्हारे कानों में क्या है?” उसने कानों से चंचल लट को हटाकर कहा – “कँगना।” “अरे! कानों में कँगना?” सचमुच दो कंगन कानों को घेरकर बैठे थे। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘मौसी’ – भुवेनश्वर

‘मौसी’ – भुवेनश्वर मानव-जीवन के विकास में एक स्थल ऐसा आता है, जब वह परिवर्तन पर भी विजय पा लेता है। जब हमारे जीवन का उत्थान या पतन, न हमारे लिए कुछ विशेषता रखता है, Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर

‘काबुलीवाला’ – रवींद्रनाथ टैगोर मेरी पाँच वर्ष की छोटी लड़की मिनी से पल भर भी बात किए बिना नहीं रहा जाता। दुनिया में आने के बाद भाषा सीखने में उसने सिर्फ एक ही वर्ष लगाया Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘दुलाईवाली’ – बंग महिला

‘दुलाईवाली’ – बंग महिला काशी जी के दशाश्‍वमेध घाट पर स्‍नान करके एक मनुष्‍य बड़ी व्‍यग्रता के साथ गोदौलिया की तरफ आ रहा था। एक हाथ में एक मैली-सी तौलिया में लपेटी हुई भीगी धोती Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद

‘सुनहला साँप’ – जयशंकर प्रसाद ”यह तुम्हारा दुस्साहस है, चन्द्रदेव!” ”मैं सत्य कहता हूँ, देवकुमार।” ”तुम्हारे सत्य की पहचान बहुत दुर्बल है, क्योंकि उसके प्रकट होने का साधन असत् है। समझता हूँ कि तुम प्रवचन Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी

कहानी: ‘लाटी’ – शिवानी लम्बे देवदारों का झुरमुट झक-झुककर गेठिया सैनेटोरियम की बलैया-सी ले रहा था। काँच की खिड़कियों पर सूरज की आड़ी-तिरछी किरणें मरीज़ों के क्लांत चेहरों पर पड़कर उन्हें उठा देती थीं। मौत Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल

‘ग्यारह वर्ष का समय’ – रामचंद्र शुक्ल दिन-भर बैठे-बैठे मेरे सिर में पीड़ा उत्‍पन्‍न हुई : मैं अपने स्‍थान से उठा और अपने एक नए एकांतवासी मित्र के यहाँ मैंने जाना विचारा। जाकर मैंने देखा Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर

‘माँ-बेटे’ – भुवनेश्वर चारपाई को घेरकर बैठे हुए उन सब लोगों ने एक साथ एक गहरी साँस ली। वह सब थके-हारे हुए खामोश थे। कमरे में पूरी खामोशी थी, मरने वाले की साँस भी थकी Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘माँ’ – प्रेमचंद

‘माँ’ – प्रेमचंद आज बन्दी छूटकर घर आ रहा है। करुणा ने एक दिन पहले ही घर लीप-पोत रखा था। इन तीन वर्षों में उसने कठिन तपस्या करके जो दस-पाँच रूपये जमा कर रखे थे, Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु

‘मारे गये ग़ुलफाम’ उर्फ ‘तीसरी कसम’ – फणीश्वरनाथ रेणु हिरामन गाड़ीवान की पीठ में गुदगुदी लगती है… पिछले बीस साल से गाड़ी हाँकता है हिरामन। बैलगाड़ी। सीमा के उस पार, मोरंग राज नेपाल से धान Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

लघुकथा: ‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता

‘सैक्स फंड’ – सुषमा गुप्ता “आंटी जी चंदा इकठ्ठा कर रहें हैं। आप भी कुछ अपनी इच्छा से दे दीजिए।” “अरे लड़कियों, ये काॅलेज छोड़ कर किस बात का चंदा इकठ्ठा करती फिर रही हो?” Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद

‘अलग्योझा’ – प्रेमचंद भोला महतो ने पहली स्त्री के मर जाने बाद दूसरी सगाई की तो उसके लड़के रग्घू के लिये बुरे दिन आ गये। रग्घू की उम्र उस समय केवल दस वर्ष की थी। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा

‘मजदूर का एक दिन’ – अनुराग शर्मा बाईं आँख रह-रह कर फड़क रही थी। कई बार मला मगर कोई फायदा न हुआ। उसे याद आया कि माँ बाईं आँख फड़कने को कितना बुरा मानती थी। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर

‘कवि का हृदय’ – रवीन्द्रनाथ टैगोर चांदनी रात में भगवान विष्णु बैठे मन-ही-मन गुनगुना रहे थे- ”मैं विचार किया करता था कि मनुष्य सृष्टि का सबसे सुन्दर निर्माण है, किन्तु मेरा विचार भ्रामक सिद्ध हुआ। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर

‘दिल्ली में एक मौत’ – कमलेश्वर मैं चुपचाप खड़ा सब देख रहा हूँ और अब न जाने क्यों मुझे मन में लग रहा है कि दीवानचंद की शवयात्रा में कम से कम मुझे तो शामिल Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे

‘मगर शेक्सपियर को याद रखना’ – संतोष चौबे 1. शहर का रंगमंडल सभागार दर्शकों से खचाखच भर चुका है। वे सभी देश के प्रख्यात नाट्य निर्देशक इरफान अहमद साहब का नाटक देखने आए हैं। इरफान Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद

‘पुरस्कार’ – जयशंकर प्रसाद आर्द्रा नक्षत्र; आकाश में काले-काले बादलों की घुमड़, जिसमें देव-दुन्दुभी का गम्भीर घोष। प्राची के एक निरभ्र कोने से स्वर्ण-पुरुष झाँकने लगा था।-देखने लगा महाराज की सवारी। शैलमाला के अञ्चल में Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘धुआँ’ – गुलज़ार

‘धुआँ’ – गुलज़ार बात सुलगी तो बहुत धीरे से थी, लेकिन देखते ही देखते पूरे कस्बे में ‘धुआँ’ भर गया। चौधरी की मौत सुबह चार बजे हुई थी। सात बजे तक चौधराइन ने रो-धो कर Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी

‘उसने तो नहीं कहा था’ – शैलेश मटियानी राइफल की बुलेट आड़ के लिए रखी हुई शिला पर से फिसलती हुई जसवंतसिंह के बाएँ कंधे में धँसी थी, मगर फिर भी काफी गहरी चोट लग Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कुत्ते की पूँछ’ – यशपाल

‘कुत्ते की पूँछ‘ – यशपाल श्रीमती जी कई दिन से कह रही थीं- “उलटी बयार” फ़िल्म का बहुत चर्चा है, देख लेते तो अच्छा था। देख आने में ऐतराज़ न था परन्तु सिनेमा शुरू होने Read more…

By Posham Pa, ago
बाल साहित्य | Children's Literature

‘एक चोर की कहानी’ – श्रीलाल शुक्ल

माघ की रात। तालाब का किनारा। सूखता हुआ पानी। सड़ती हुई काई। कोहरे में सब कुछ ढँका हुआ। तालाब के किनारे बबूल, नीम, आम और जामुन के कई छोटे-बड़े पेड़ों का बाग। सब सर झुकाए Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी

‘उसने कहा था’ – चंद्रधर शर्मा गुलेरी बड़े-बड़े शहरों के इक्के-गाड़ीवालों की जबान के कोड़ों से जिनकी पीठ छिल गई है, और कान पक गए हैं, उनसे हमारी प्रार्थना है कि अमृतसर के बंबूकार्टवालों की Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी

‘कमाल की प्रेम-कहानी’ – माखनलाल चतुर्वेदी ‘कला और साहित्य‘ से 1. उस दिन स्मरना पर ग्रीक लोगों का कब्ज़ा हो गया था और कमालपाशा टर्की के भाग्य की डोरी अपनी ज़िन्दगी और मौत से बाँधकर Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा

‘लवर्स’ – निर्मल वर्मा ‘एल्प्स’ के सामने कारीडोर में अंग्रेजी-अमरीकी पत्रिकाओं की दुकान है। सीढ़ियों के नीचे जो बित्ते-भर की जगह खाली रहती है, वहीं पर आमने-सामने दो बेंचें बिछी हैं। इन बेंचों पर सेकंड Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो

‘टोबा टेक सिंह’ – सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह पागलों का भी तबादला होना चाहिए। यानी जो मुस्लमान पागल Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती

‘सिक्का बदल गया’ – कृष्णा सोबती खद्दर की चादर ओढ़े, हाथ में माला लिए शाहनी जब दरिया के किनारे पहुंची तो पौ फट रही थी। दूर-दूर आसमान के परदे पर लालिमा फैलती जा रही थी। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा

‘एक दिन का मेहमान’ – निर्मल वर्मा उसने अपना सूटकेस दरवाजे के आगे रख दिया। घंटी का बटन दबाया और प्रतीक्षा करने लगा। मकान चुप था। कोई हलचल नहीं – एक क्षण के लिए भ्रम Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी

‘चीफ की दावत’ – भीष्म साहनी आज मिस्टर शामनाथ के घर चीफ की दावत थी। शामनाथ और उनकी धर्मपत्नी को पसीना पोंछने की फुर्सत न थी। पत्नी ड्रेसिंग गाउन पहने, उलझे हुए बालों का जूड़ा Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री

‘फंदा’ – आचार्य चतुरसेन शास्त्री सन् १९१७ का दिसम्बर था। भयानक सर्दी थी। दिल्ली के दरीबे-मुहल्ले की एक तंग गली में एक अँधेरे और गन्दे मकान में तीन प्राणी थे। कोठरी के एक कोने में एक Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’

‘फांसी’ – विश्वंभरनाथ शर्मा ‘कौशिक’ रेवतीशंकर तथा पंडित कामताप्रसाद में बड़ी घनिष्ठ मित्रता थी। दोनों एक ही स्कूल तथा एक ही क्लास में वर्षों तक साथ-साथ पढ़े थे। बाबू रेवतीशंकर एक धनसम्पन्न व्यक्ति थे। उनके Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘हार की जीत’ – सुदर्शन

‘हार की जीत’ – सुदर्शन माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को अपना घोड़ा देखकर आता था। भगवद् – भजन से जो Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश

‘तिरिछ’ – उदय प्रकाश इस घटना का संबंध पिताजी से है। मेरे सपने से है और शहर से भी है। शहर के प्रति जो एक जन्म-जात भय होता है, उससे भी है। पिताजी तब पचपन Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पिता’ – ज्ञानरंजन

‘पिता’ – ज्ञानरंजन उसने अपने बिस्तरे का अंदाज लेने के लिए मात्र आध पल को बिजली जलाई। बिस्तरे फर्श पर बिछे हुए थे। उसकी स्त्री ने सोते-सोते ही बड़बड़ाया, ‘आ गए’ और बच्चे की तरफ Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार

‘पाजेब’ – जैनेन्द्र कुमार बाजार में एक नई तरह की पाजेब चली है। पैरों में पड़कर वे बड़ी अच्छी मालूम होती हैं। उनकी कड़ियां आपस में लचक के साथ जुड़ी रहती हैं कि पाजेब का Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय

‘रोज’ (गैंग्रीन) – अज्ञेय दोपहर में उस सूने आँगन में पैर रखते हुए मुझे ऐसा जान पड़ा, मानो उस पर किसी शाप की छाया मँडरा रही हो, उसके वातावरण में कुछ ऐसा अकथ्य, अस्पृश्य, किन्तु Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘बहादुर’ – अमरकांत

‘बहादुर’ – अमरकांत सहसा मैं काफी गम्भीर था, जैसा कि उस व्यक्ति को हो जाना चाहिए, जिस पर एक भारी दायित्व आ गया हो। वह सामने खड़ा था और आंखों को बुरी तरह मटका रहा था। Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी

‘खून का रिश्ता’ – भीष्म साहनी खाट की पाटी पर बैठा चाचा मंगलसेन हाथ में चिलम थामे सपने देख रहा था। उसने देखा कि वह समधियों के घर बैठा है और वीरजी की सगाई हो Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘कर्मनाशा की हार’ – शिवप्रसाद सिंह

काले सांप का काटा आदमी बच सकता है, हलाहल ज़हर पीने वाले की मौत रुक सकती है, किंतु जिस पौधे को एक बार कर्मनाशा का पानी छू ले, वह फिर हरा नहीं हो सकता. कर्मनाशा Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘सौत’ – प्रेमचंद

‘सौत’ – प्रेमचंद 1 जब रजिया के दो-तीन बच्चे होकर मर गये और उम्र ढल चली, तो रामू का प्रेम उससे कुछ कम होने लगा और दूसरे ब्याह की धुन सवार हुई। आये दिन रजिया Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद

‘ठाकुर का कुआँ’ – प्रेमचंद जोखू ने लोटा मुँह से लगाया तो पानी में सख्त बदबू आयी। गंगी से बोला- “यह कैसा पानी है? मारे बास के पिया नहीं जाता। गला सूखा जा रहा है Read more…

By Posham Pa, ago
कहानी | Story

कहानी: ‘पूस की रात’ – प्रेमचंद

‘पूस की रात’ – प्रेमचंद 1 हल्कू ने आकर स्त्री से कहा- सहना आया है, लाओ, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो छूटे। मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर Read more…

By Posham Pa, ago

Copyright © 2018 पोषम पा — All rights reserved.




Subscribe to Blog via Email

Enter your email address to subscribe to this blog and receive notifications of new posts by email.


error: