तेरी यादें हैं जैसे
किसी किसान ने लिया
अपने खेतों के लिए
ज़मींदार से कर्ज़ हो
और
बारिश ही न हो
चुका रहा हूँ जैसे
उम्मीदों का सूद और
भावनाओं का ऋण
उस सूखे का
जाने कब से…
तेरी यादें हैं जैसे
किसी किसान ने लिया
अपने खेतों के लिए
ज़मींदार से कर्ज़ हो
और
बारिश ही न हो
चुका रहा हूँ जैसे
उम्मीदों का सूद और
भावनाओं का ऋण
उस सूखे का
जाने कब से…