निबन्ध | Essay

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी

‘गेहूँ बनाम गुलाब’ – रामवृक्ष बेनीपुरी गेहूँ हम खाते हैं, गुलाब सूँघते हैं। एक से शरीर की पुष्टि होती है, दूसरे से मानस तृप्‍त होता है। गेहूँ बड़ा या गुलाब? हम क्‍या चाहते हैं – Read more…

By Posham Pa, ago

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