Tag: Poem on Politics

Arrow, Baan, Archery

लक्ष्य-भेद

बोलो बेटे अर्जुन! सामने क्या देखते हो तुम? संसद? सेक्रेटेरिएट? मंत्रालय? या मंच?? अर्जुन बोला तुरन्त गुरुदेव! मुझे सिवा कुर्सी के कुछ भी नज़र नहीं आता! पुलकित गुरु बोले...
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