Tag: Yah Aakanksha Samay Nahi

Gagan Gill

‘यह आकांक्षा समय नहीं’ से कविताएँ

जा कर प्रतीक्षा करती-करती सोयी वह रोयी जा कर दूसरे जन्म में। घड़ी जिसकी प्रतीक्षारत उसके सिर में आज के दिन टाइम-बम एक घड़ी जिसकी ख़राब थी बारूद जिसका चालू। फिर सिर देखा उस मायावी को फिर रात सपने में फिर सिर सफ़ेद था सुबह उठने पर। एक...
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