Tag: Yah Aakanksha Samay Nahi
‘यह आकांक्षा समय नहीं’ से कविताएँ
जा कर
प्रतीक्षा करती-करती
सोयी
वह
रोयी
जा कर
दूसरे
जन्म में।
घड़ी जिसकी
प्रतीक्षारत
उसके सिर में
आज के दिन
टाइम-बम एक
घड़ी जिसकी ख़राब थी
बारूद
जिसका
चालू।
फिर सिर
देखा उस मायावी को
फिर रात
सपने में
फिर सिर
सफ़ेद था
सुबह उठने पर।
एक...
