तुम्हारे ख़्वाब में बिखरे नज़ारे याद आते हैं

तुम्हारे ख़्वाब में बिखरे नज़ारे याद आते हैं
तुम्हारी शान से लिपटे सितारे याद आते हैं

तुम्हारी आँख के जंगल में काजल की ये पगडण्डी
मुझे इस सिम्त में भटके बिचारे याद आते हैं

मैं काले आसमां को देखता हूँ और रोता हूँ
मैं आँखें मूंदता हूँ तो सितारे याद आते हैं

यहाँ हर याद में दरिया है या दरिया का मंज़र है
मुझे दरिया से रूठे वो किनारे याद आते हैं

दुआ करना की ये काँटा कभी ना पाँव से निकले
मुझे इस दर्द से बीते ख़सारे याद आते हैं

नयी सड़कों को बनता देखता हूँ और हँसता हूँ
मुझे ये देख कर वादे तुम्हारे याद आते हैं