वर्जिनिया वुल्फ़ – कुछ पंक्तियाँ

“अधिकतर इतिहास में, अज्ञात इंसान एक औरत थी।”

 

“एक औरत को अगर फिक्शन लिखना है तो उसके पास पैसा और उसका खुद का एक कमरा होना चाहिए।”

 

“किताबें आत्मा के आईने हैं।”

 

“मैंने दोस्त खोए हैं, कुछ मृत्यु के कारण… और कुछ सड़क पार करने की निरी असमर्थता के कारण।”

 

“दूसरों की आँखें हमारे क़ैदख़ाने हैं; उनके विचार हमारे पिंजरे।”

 

“कुछ लोग पुजारियों के पास जाते हैं; कुछ कविताओं के पास; मैं अपने दोस्तों के पास जाती हूँ।”

 

“अगर किसी ने अच्छे से न खाया हो, तो वह न तो ठीक से सोच सकता है, न ही प्रेम कर सकता है, न सो सकता है।”

 

“पुरुषों के लिए स्त्रियाँ इतनी दिलचस्प क्यों होती हैं जितने दिलचस्प स्त्रियों के लिए पुरुष नहीं होते?”

 

“अगर कोई स्त्रियों के साथ मित्रवत हो सके, तो यह कितनी खुशी की बात है – पुरुषों के साथ रिश्ते की तुलना में यह रिश्ता कितना गुप्त और निजी होगा। क्यों न इसके बारे में सच्चाई से लिखें?”

 

“अपने पिता पर निर्भर करने से अपने पेशे पर निर्भर करना, गुलामी का एक कम घिनौना रूप है।”

 

“अगर आप अपने बारे में सच नहीं बोल सकते, तो दूसरों के बारे में भी सच नहीं बोल सकते।”

 

“मैं जड़वत हूँ, फिर भी प्रवाहमान हूँ।”

 

(अनुवाद: पुनीत कुसुम)