‘हमारा मुल्क’ – इब्ने इंशा

”ईरान में कौन रहता है?”

”ईरान में ईरानी कौम रहती है।”

”इंग्लिस्तान में कौन रहता है?”

”इंग्लिस्तान में अंग्रेजी कौम रहती है।”

”फ्रांस में कौन रहता है?”

”फ्रांस में फ्रांसीसी कौम रहती है।”

”ये कौन-सा मुल्क है?”

”ये पाकिस्तान है!”

”इसमें पाकिस्तानी कौम रहती होगी?”

”नहीं! इसमें पाकिस्तानी कौम नहीं रहती। इसमें सिन्धी कौम रहती है। इसमें पंजाबी कौम रहती है। इसमें बंगाली कौम रहती है। इसमें यह कौम रहती है। इसमें वह कौम रहती हैं।”

”लेकिन पंजाबी तो हिन्दुस्तान में भी रहते हैं! सिन्धी तो हिन्दुस्तान में भी रहते हैं! फिर ये अलग मुल्क क्यों बनाया था?”

”गलती हुई। माफ कर दीजिए। आइन्दा नहीं बनायेंगे!”

■■■

यह व्यंग्य इब्ने इंशा की किताब ‘उर्दू की आखिरी किताब’ से लिया गया है!

इस किताब को खरीदने के लिए ‘उर्दू की आखिरी किताब’ पर या नीचे दी गयी इमेज पर क्लिक करें!

urdu ki aakhiri kitaab


Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

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