‘लाठी’ – महेश नेणवाणी

जो
भगवान को मानता है
वह लँगड़ा है
और उसे
बैसाखियों की ज़रुरत है,

जो
भगवान को नहीं मानता
वह अन्धा है
उसे
लाठी की ज़रुरत है,

आपको
तय सिर्फ़ इतना करना है
कि लाठी, आप
अन्धे होकर उठाना चाहेंगे
या लँगड़े होकर?


रूपांतर: स्वयं कवि द्वारा

चित्र श्रेय: Feliphe Schiarolli


Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

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