नव-लेखन | New Writing

कविता: ‘फुलझड़ी’ – पुनीत कुसुम

एक समस्या मुँह खोले खड़ी है वह फुलझड़ी है या फूलों से झड़ी है? है बदन ज्यों चन्द्रमा और थोड़ा काँच हो रेत से लिपटे हो दोनों और थोड़ी आँच हो एक वृत फिर आतिशों Read more…

By Puneet Kusum, ago
error: