Tag: स्वप्न / ख़्वाब

Kali Aurat Ka Khwab - Irshad Kamil

इरशाद कामिल कृत ‘काली औरत का ख़्वाब’

विवरण: सर्दी अभी पूरी तरह उतरी नहीं थी पहाड़ से। घर के आँगन में देर रात तक बैठा जा सकता था। मैं चारपाई पर बैठा...
Muktibodh

काठ का सपना

"धन्ये, मैं पिता निरर्थक था, कुछ भी तेरे हित न कर सका..!" ये पंक्तियाँ निराला की लम्बी कविता, उनके द्वारा अपनी पुत्री सरोज की याद में लिखे गए शोकगीत 'सरोज-स्मृति' की पंक्तियाँ हैं। लेकिन आप जब मुक्तिबोध की यह कहानी 'काठ का सपना' पढ़ेंगे तो इस कहानी को परिभाषित करने के लिए निराला की इन पंक्तियों से बेहतर आपको कुछ नहीं मिलेगा.. यह भी ध्यान देने योग्य बात है कि इस कहानी में लेखक की पुत्री का नाम भी 'सरोज' है! एक उद्धरण प्रस्तुत है, पूरी कहानी लिंक में- "उसके पिता अपनी बालिकाओं को देख प्रसन्न नहीं होते हैं। विक्षुब्ध हो जाता है उनका मन। नन्हीं बालिका सरोज का पीला उतरा चेहरा, तन पे फटा हुआ सिर्फ एक 'फ्राक' और उसके दुबले हाथ उन्हें बालिका के प्रति अपने कर्त्तव्य की याद दिलाते हैं; ऐसे कर्त्तव्य की जिसे वे पूरा नहीं कर सके, कर भी नहीं सकेगें, नहीं कर सकते थे। अपनी अक्षमता के बोध से ये चिढ़ जाते हैं। और वे उस नन्हीं बालिका को डाँट कर पूछते हैं, 'यहाँ क्यों बैठी है? अंदर क्यों नहीं जाती।'"

एक जीवी, एक रत्नी, एक सपना

'हाय री स्त्री, डूबने के लिए भी तैयार है, यदि तेरा प्रिय एक सागर हो!' 'फिर उस लड़की का भी वही अंजाम हुआ, जो उससे पहले कई और लड़कियों का हो चुका था और उसके बाद कई और लड़कियों का होना था। वह लड़की बम्बई पहुँचकर कला की मूर्ती नहीं, कला की कब्र बन गई, और मैं सोच रही थी, यह रत्नी.. यह रत्नी क्या बनेगी?'
nayi kitaab - sapno ke kareeb ho aankhein

जय प्रकाश मानस कृत ‘सपनों के करीब हो आँखें’

विवरण: जय प्रकाश मानस के प्रस्तुत संकलन की कविताएं आम आदमी की फ़िक्र में लिखी गयी कविताएँ हैं। उनकी कविताओं के सरोकार के केन्द्र...
Girgit

गिरगिट का सपना

क्या आपके पास अपने नाती-पोतों को सुनाने वाली कहानियाँ ख़त्म हो चुकी हैं? या आप एक ही कहानी इतनी बार सुना चुके हैं कि वे वह कहानी आपसे आगे-आगे आपको ठीक करते सुनाते चलते हैं? अगर हाँ, तो लीजिए मोहन राकेश की एक कहानी, जो बच्चों को सुनाए जाने पर न केवल उन्हें रोमांचित करेगी बल्कि यह सीख भी देगी कि जो हमें प्राप्त है, वह किसी कारण से है और उससे संतुष्ट रहना मानवों के लिए एक धारणीय गुण है! :)

देवेश ‘अलख’ कृत ‘ख़्वाब अधखुली आँखों के’

विवरण: देवेश ‘अलख’ की कविताओं का संकलन अद्भुत दृश्यों का संग्रह है जिनमें विरल संवेदनशीलता एवं विविधता देखने को मिलती है। इनकी कविताओं में प्यार...
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