कविताएँ | Poetry

‘दरवाज़े गर ज़बान की चिटखनी खोल पाते तो बताते..’ – गौरी चुघ की नज्में

गौरी चुघ स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में एक दशक से ज़्यादा समय से सक्रिय हैं। उन्होंने शिक्षा जगत से जुड़े विभिन्न सरकारी, ग़ैर-सरकारी और निजी संस्थानों में अलग-अलग भूमिकाओं में काम किया है। 2008 में Read more…

By Posham Pa, ago

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