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घृणा का गान
सुनो, तुम्हें ललकार रहा हूँ, सुनो घृणा का गान!
तुम, जो भाई को अछूत कह वस्त्र बचाकर भागे
तुम, जो बहिनें छोड़ बिलखती, बढ़े जा रहे...
प्रेम ही एकमात्र बचा हुआ सफ़ेद ध्वज होगा
सारी लाशें उठकर चल पड़ेंगी
क़ब्र को चीरकर
सरहदों पर दफ़नाए गए सैनिक रो पड़ेंगें
दोनों ओर की ज़मीन से फूटेगा
ख़ून का एक दरिया
पेड़ों की पत्तियाँ हो जाएँगी सुर्ख़
सारे...

