तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है,
फ़ेसबुक पर पोस्ट करनी है,
कैप्शन देना है―
तितली।

तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है
जिसमें बख़ूबी कैद हो
तुम्हारी स्वप्निल आँखों का
उर्मिल नीलापन
कैप्शन देना है―
मछली।

तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है
एम्स्टर्डम की सड़कों पर,
अलसाये-से मौसम में,
वॉयलिन बजाते हुए
कैप्शन देना है―
पगली।

तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है
ब्लैक हाई हील्स और
स्टॉकिंग्स में
कैप्शन देना है―
बिल्ली।

तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है
नागफनी, लिली,
शेफालिका
से घिरे किसी बाग में,
या वादी में
शिकारा पर बैठे हुए
कैप्शन देना है―
सिलबिल्ली।

तुम्हारी एक तस्वीर लेनी है
जिसके पार्श्व में
हो कोई धुत्त मेट्रो स्टेशन,
जमुना,
क़ुतुब मिनार,
लालकिला,
हुमायूँ का मक़बरा,
या सिर्फ़,
ज़रा सा कोहरा
कैप्शन देना है―
दिल्ली।

कुशाग्र अद्वैत
कुशाग्र अद्वैत बनारस में रहते हैं, इक्कीस बरस के हैं, कविताएँ लिखते हैं। इतिहास, मिथक और सिनेेमा में विशेष रुचि रखते हैं। अभी बनारस हिन्दू विश्विद्यालय से राजनीति विज्ञान में ऑनर्स कर रहे हैं।