चलो बच्चे बन जाते हैं

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ सिर्फ़ हमारी
मनमानी चलती हो..
हमसे कोई उम्मीद न हो..
कोई कभी ख़फा न हो..
जब मिट्टी से सन जाते ..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते …..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ सभी हमसे प्यार करें..
हमारी हुलचुलाहट को टुकटुकात रहें..
गलतियों को हमारी नजरअन्दाज करें..
हम ख़ूब हठ करें..
न मिलने पर कन जाते ..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ न भविष्य की चिंता..
न भूत का डर हो..
किसी ज़िम्मेदारी
की कोई फ़िकर न हो..
थोड़े में रूठते, थोड़े में मन जाते ..
चलो एक बार फ़िर से बच्चे बन जाते ..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ केवल मासूमियत हो..
ईर्ष्या, द्वैष, क्रोध, अंहकार से
हम अनभिज्ञ हों..
विज्ञान की भाषा में
जब बालमनोविज्ञान कहलाते ..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ हमें वास्तविक और
काल्पनिक का ज्ञान न हो..
अपने-परायों का बोध न हो..
जहाँ बालमन चहचहाते ..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते ..!
जहाँ जन्म-मरण से
हम अनजान हों..
लोक-लाज का भय न हो..
सच-झूठ से कोई वास्ता न हो..
सब अपनेपन में ढल जाते..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते..!!

चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते..!
जहाँ हम वात्सलय में लिप्त हो..
सुनने को माँ की लोरी,
और छिपने को माँ का आँचल,
आराम करने को ममता की छाया हो..
जब घनाघोर घन छा जाते..
चलो एक बार फिर से बच्चे बन जाते..!!