‘Saral Rekha’, a poem by Poonam Sonchhatra

मैंने टूटते हुए तारे देखे थे
तुम्हारे हर एक चुम्बन के साथ

न्यूटन का गति का तीसरा नियम यही कहता है कि
‘प्रत्येक क्रिया की प्रतिक्रिया बराबर एवं विपरित दिशा में होती है’

अब जबकि तुम मेरी आत्मा का एक हिस्‍सा हो
मेरा मन ये जानने के लिए व्याकुल है कि
मेरे रहने या न रहने से
तुम्हारे जीवन में कहीं कोई परिवर्तन
होता भी है या कि नहीं

तुम्हें मिलना था, हम मिले
तुम्हें जुड़ना था, हम जुड़े
तुम्हें जाना था, तुम चले गए..
मैं न कह सकी, न सुन सकी, न कुछ कर सकी…

मैं तब भी वहीं थी, अब भी वहीं हूँ
और शायद जीवन भर वहीं रहूँगी

क्या करूँ
मेरा जीवन तुम्हारी तरह सरल रेखा में नहीं चलता।

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