Tag: Urdu ghazal

Dattatreya Kaifi

हो के आशिक़ जान मरने से चुराए किस लिए

हो के आशिक़ जान मरने से चुराए किस लिए मर्द-ए-मैदाँ जो न हो मैदाँ में आए किस लिए जो दिल-ओ-ईमाँ न दीं नज़्र उन बुतों को...
Bekhud Dehlvi

सब्र आता है जुदाई में न ख़्वाब आता है

सब्र आता है जुदाई में, न ख़्वाब आता है रात आती है इलाही कि अज़ाब आता है बे-क़रारी दिल-ए-बेताब की ख़ाली तो नहीं या वो ख़ुद आते...
Ameer Minai

पहले तो मुझे कहा निकालो

पहले तो मुझे कहा निकालो फिर बोले ग़रीब है बुला लो बे-दिल रखने से फ़ाएदा क्या तुम जान से मुझ को मार डालो उस ने भी तो देखी...
Altaf Hussain Hali

वाँ अगर जाएँ तो ले कर जाएँ क्या

वाँ अगर जाएँ तो ले कर जाएँ क्या मुँह उसे हम जा के ये दिखलाएँ क्या दिल में है बाक़ी वही हिर्स-ए-गुनाह फिर किए से अपने हम...
Majaz Lakhnavi

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई

ख़ुद दिल में रह के आँख से पर्दा करे कोई हाँ लुत्फ़ जब है पा के भी ढूँढा करे कोई तुम ने तो हुक्म-ए-तर्क-ए-तमन्ना सुना दिया किस दिल...
Hafeez Merathi

चाहे तन मन सब जल जाए

चाहे तन मन सब जल जाए सोज़-ए-दरूँ पर आँच न आए शीशा टूटे ग़ुल मच जाए दिल टूटे आवाज़ न आए बहर-ए-मोहब्बत तौबा! तौबा! तैरा जाए न डूबा जाए ऐ...
Irfan Siddiqi

जाँ से गुज़रे भी तो दरिया से गुज़ारेंगे तुम्हें

जाँ से गुज़रे भी तो दरिया से गुज़ारेंगे तुम्हें साथ मत छोड़ना हम पार उतारेंगे तुम्हें तुम सुनो या न सुनो, हाथ बढ़ाओ न बढ़ाओ डूबते डूबते...
Hafeez Hoshiarpuri

न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू

न पूछ क्यूँ मिरी आँखों में आ गए आँसू जो तेरे दिल में है इस बात पर नहीं आए वफ़ा-ए-अहद है ये पा-शिकस्तगी तो नहीं ठहर गया...
Nazeer Akbarabadi

दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप

'Dil Ko Lekar Humse', by Nazeer Akbarabadi दिल को लेकर हमसे अब जाँ भी तलब करते हैं आप लीजिए हाज़िर है पर ये तो ग़ज़ब करते...
Qateel Shifai

मैंने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कौन उठाएगा

'Maine Poochha Pehla Patthar Mujh Par Kaun Uthaaega', a ghazal by Qateel Shifai मैंने पूछा पहला पत्थर मुझ पर कौन उठाएगा आई इक आवाज़ कि तू...
Ameer Minai

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता

सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता निकलता आ रहा है आफ़्ताब आहिस्ता आहिस्ता जवाँ होने लगे जब वो तो हमसे कर लिया पर्दा हया यकलख़्त...
Dagh Dehlvi

ये बात बात में क्या नाज़ुकी निकलती है

ये बात-बात में क्या नाज़ुकी निकलती है दबी-दबी तिरे लब से हँसी निकलती है ठहर-ठहर के जला दिल को, एक बार न फूँक कि इसमें बू-ए-मोहब्बत अभी...
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