घर

कहीं भी घर जोड़ लेंगे हम
बस ऊष्णता बची रहे
घर के कोने में
बची रहे धूप
चावल और आटा बचा रहे
जरूरत भर के लिए

कुछ चिड़ियों का आना-जाना रहे
और
किसी गिलहरी का

तुम्हारे गाल पर कुछ गुलाबी रंग रहे
और
पृथ्वी कुछ हरी रहे
शाम को साथ बाजार जाते समय
मेरे जेब में बस कुछ पैसे।