लड़की की काठी

दीपा और मुकुल दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों एक साथ एक ही कॉलेज से एम.ए. कर रहे थे। इतना प्यार कि दीपा ने अपनी बुआ को मुकुल के बारे में और मुकुल ने अपनी दीदी को दीपा के बारे में बता रखा था। एक बार रविवार के दिन दीपा ने मुकुल को बड़े मंदिर मेंं मिलने के लिए कहा।

मंदिर पहुँचकर मुकुल ने दीपा से पूछा : “आज रविवार को कैसे याद किया। सब ठीक तो है ना?”

दीपा : “हूँ… सब ठीक है।”

मुकुल : “कल तो मिले ही थे कॉलेज में। कल फिर मिल लेते। बहुत मुश्किल से बहाना मार के आया हूँ घर पर। बोलो क्या हुआ?”

दीपा : “कुछ नहीं बस तुम्हें देखने का मन कर रहा था।”

मुकुल : “अच्छा। देख लिया? जाऊँ अब? तुम भी घर जाओ। आराम कर लो। कल मिलेंगे।”

दीपा : “नहीं तुम जाओ। मेरा घर जाने का मन नहीं है।”

मुकुल : “अरे नाराज क्यों हो रहे हो। नहीं जा रहा। बताओ क्या बात है?”

दीपा :  “मेरे घर पर मेरे मामा-मामी आए हुए हैं। मुझे वो अच्छे नहीं लगते। डर लगता है उनसे।”

मुकुल : क्या? मामा-मामी से भी कोई डरता है क्या?

दीपा : “सुनो! मैं आज तुम्हें अपनी ज़िन्दगी का एक वो सच बताना चाहती हूँ जो मैं कभी किसी को नहीं बता सकी।”

मुकुल : “हाँ-हाँ बताओ।”

दीपा : “लेकिन इससे भी पहले तुम्हें वादा करना पड़ेगा…”

मुकुल : ”कैसा वादा?”

दीपा : “यही कि इसको सुनने के बाद हमारे रिश्ते में कोई फर्क नहीं आएगा।”

मुकुल : (मुस्कराते हुए) “तुम भी ना, बोलो भी क्या बात है..?”

दीपा : “नहीं, पहले वादा।”

मुकुल : “ओकेय बाबा, वादा। नहीं आएगा कोई फर्क। हमारे रिश्ते में। अब बताओ क्या बात है ?”

दीपा : “ये बात तब की है जब न तो मेरे मामा की शादी हुई थी और न मेरी बुआ की। तब मैं आठवीं कक्षा में पढ़ती थी। मेरी बुआ और मेरे मामा का अफेयर चल रहा था। जिसके बारे में बुआ ने मुझे बता रखा था। मैं उन दोनों की फोन पर आपस में बातें करवाया करती थी। उनके लव लैटर छुपा कर रखा करती थी। जब उनमें अनबन हो जाती थी तो मैं उनका पैचअप करवाया करती थी। बुआ और मामा मेरे लिए ढेर सारे गिफ्ट और चॉकलेट्स लाया करते थे।”

मुकुल : “अरे वाह। मेरी लव गुरू। ये बताना था। बहुत अच्छा। (हँसकर) आज ही तुम्हारी बुआ से पंगे लूँगा।”

दीपा : “आगे सुनो। जब मैं नौंवी कक्षा में थी तो बुआ की शादी तय हो गई थी। जिसको लेकर मामा और बुआ में लड़ाई होने लग गई थी। फिर एक दिन ऐसा भी आया कि मामा ने बुआ के फोन भी उठाने बंद कर दिए। बुआ परेशान रहने लग गई थी। रोती रहती थी। मुझसे उनका रोना नहीं देखा गया। वो बस एक बार, आखिरी बार मामा से बात करना चाहती थी। कुछ दिनों बाद मैंने मामा को फोन लगाया। उनसे बात की। मैंने उन्हें बुआ की हालत के बारे में बताया, उनसे रिक्वेस्ट की कि बस एक बार बुआ से बात कर लो। उन्होंने कहा कि ठीक है। मैं बात कर लूँगा। लेकिन तुम्हें मेरी एक शर्त माननी पड़ेगी। मैंने पूछा कैसी शर्त। वो बोले बाद में बताऊँगा। मैंने कहा कि ठीक है बता देना। मुझे आपकी सारी शर्तें मंजूर हैं। बस आप एक बार बुआ से बात कर लो। उन्होंने कहा ठीक है कह देना फोन कर लेंगी वो।”

मुकुल : “अरे वाह। फिर क्या हुआ? क्या सब ठीक हो गया। और क्या शर्त थी मामा की? ”

दीपा : “बुआ की शादी को दो महीने हो गए थे। एक दिन मामा हमारे घर आए। मैं एक्साईटड थी मामा और बुआ की बातों को जानने के लिए। मामा से पूछना चाहती थी। लेकिन सामने मम्मी बैठी थीं। जब मम्मी कपड़े धोने नीचे चली गईं तो मैंने मामा से पूछा कि हो गयी थी क्या बात बुआ से? मामा ने कहा कि हाँ हो गई थी। तो बताओ क्या शर्त थी आपकी? तो उन्होंने कहा…”

मुकुल : “क्या कहा उन्होंने ?”

दीपा : (काँपते होंठो से) “मेरे टॉप की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसे उतारो…”

मुकुल : (चौंकते हुए) “क्या.! तुम्हें पता भी है तुम क्या कह रही हो।…. क्या किया तब तुमने?”

दीपा : ”मुझे क्या पता था कि मामा ऐसी भी शर्त रखते हैं। मैंने मना किया। उन्होंने कहा उतारो नहीं तो मैं तुम्हारी बुआ का तलाक करवा दूँगा। मैं पूरी तरह डर गई थी। पसीने में भीग गई थी। मेरा पूरा शरीर काँप रहा था। मजबूर हो गई थी मैं।”

मुकुल : (दाँत पीसते हुए, गुस्से में लाल होकर) “तुमने शोर क्यों नहीं मचाया? थप्पड़ क्यों नहीं जड़ा उस कुत्ते को। और क्या क्या किया उसने? सेक्स भी किया?”

दीपा : (भरे हुए गले और आँसुओं के साथ मशीन की तरह बोलती जा रही थी।) “उन्होनें धीरे-धीरे मेरे सारे कपड़े उतार दिए थे। मेरे शरीर को खाने की कोशिश में। संभोग का भी पूरा प्रयास किया। जो किसी कारण से पूरा नहीं हो पाया।”

मुकुल : (मुक्का दीवार में मारते हुए) “अब क्यों बता रहे हो मुझे। पहले क्यों नहीं बताया। मुझे उस कुत्ते का फोन नम्बर बताओ। मैं जान से मार दूँगा उसे।”

दीपा : “उसके बाद वो जब भी हमारे घर आते मेरा इस्तेमाल करते। रातभर रुकते तो रात को अपने बैड पर बुलाने का इशारा करते। मैं उनके नाम से डरने लग गई थी।”

मुकुल : “मेरी बात करवाओ उससे, मुझे पुलिस में रिपोर्ट करनी है उसकी।”

दीपा : “कोई फायदा नहीं है। जब मैं ग्यारहवीं कक्षा में थी तो उनकी शादी हो गई थी। मुझे लगता था कि उनकी शादी के बाद ये सब नहीं होगा। लेकिन वो अब जब भी आते हैं इशारों इशारों में मुझे बुलाते हैं। अकेले में पकड़ते हैं। दबोचते हैं। उनके जेल जाने से उनका निर्दोष परिवार भी सजा भुगतेगा। एक बच्ची भी है उनकी।”

मुकुल : “तुम अब भी उसी की तरफदारी कर रही हो।”

दीपा : “तरफदारी नहीं है। मेरे आवाज उठाने से मेरी बुआ का घर बर्बाद हो जाता। मेरे मम्मी-पापा के रिश्ते खराब हो जाते। नाना और दादा के संबंध बदनाम हो जाते। मामी और उनकी बच्ची वो अनाथ हो जाते। और इन सबसे भी बड़ा ये समाज। कौन सुनता मेरी? कौन समझता मुझे? कौन अपनाता मुझे? मेरे अपने ही मुझे मार देते या खुद मर जाते।”

मुकुल : ”आज के बाद अपनी शक्ल मत दिखा देना मुझे। मैं जब रूम पर चलने को बोलता था तब मुझे तो तुम ऐसे मना कर देती थी जैसे कोई सती-सावित्री सीता माता हो। और वहाँ अपने मामा की रखैल बनकर अय्याशियाँ बाँटती रही।”

दीपा : (रोते-रोते) ”क्या तुम्हें भी मेरे शरीर से ही प्यार है? क्या तुम्हें भी वही सब चाहिए था। तुम्हें इसलिए मना करती थी क्योंकि मैं सहज नहीं महसूस करती थी।”

मुकुल : (गुस्से में चिल्लाते हुए) “हाँ-हाँ! मेरे साथ क्यों सहज होगी। तुझे तो उसकी ही रखैल बने रहना पसंद है। साली-वैश्या। मुझसे शादी करने के सपने ले रही थी। मुझे प्यार के जाल में फँसाकर अपना शुद्धिकरण करना चाह रही थी। अच्छा हुआ तूने आज ये सब बता दिया। नहीं तो मेरी तो ज़िन्दगी बर्बाद हो जाती। शादी के बाद तू तो मुझे ऑफिस भेजकर अपने मामा का बिस्तर ठंडा करती।”

दीपा ने मुकुल के गाल पर चाँटा जड़ दिया और रोती-रोती बैठ गई। मुकुल गालियाँ देता हुआ मंदिर से निकल गया।