दिलोदिमाग

दिल है,
गाँव-सा सीधा,
शांत है,
ज़िंदा है,
दयालु है।

दिमाग है,
शहर-सा कपटी,
अशांत है,
नशे में है,
चालू है।

दिल है,
गाँव का पेड़,
छायादार है,
फलदायी है,
तसल्ली से भरा।

दिमाग है,
शहर का ठूँठ,
आत्मप्रेमी है,
मददायी है,
अकड़ से भरा।

दिल है,
गाँव की नहर,
गहरी है,
बह रही है,
अमृत है।

दिमाग है,
शहर का नाला,
अटा पड़ा है,
ठहरा है,
कीचड़ है।

दिल है,
गाँव का खेत,
लहलहाता है,
हरा-भरा है,
उपजाऊ है।

दिमाग है,
शहर की कंक्रीट,
ढहती है,
पत्थरीली है,
बंजर है।

दिल है,
गाँव का मेला,
लोकगीत है,
उत्साह है,
आनंद है।

दिमाग है,
शहर का बाजार,
चिंता है,
अवसाद है,
दिवालियापन है।

© गुलाब हिंदवी