परियों की बातें

मैं अपने दोस्त के पास बैठा था। उस वक़्त मेरे दिमाग़ में सुक़्रात का एक ख़याल चक्कर लगा रहा था— क़ुदरत ने हमें दो कान दिये हैं और दो आंखें मगर ज़बान सिर्फ़ एक ताकि हम बहुत ज़्यादा सुनें और देखें और बोलें कम, बहुत कम!

मैंने कहा “आज कोई अफ़्साना सुनाओ, दोस्त!”

वो बोला। तो आओ, आज मैं तुम्हें एक अज़ीमुश्शान अफ़्साना सुनाऊं:

दो भेड़ें एक जौहड़ के किनारे पानी पी रही थीं।

पानी पीते हुये छोटी भेड़ ने कहा- “मैं अक्सर सुनती हूँ उस गाँव के लोग सुंदर, मन मोहनी परियों की बातें किया करते हैं!”

बड़ी भेड़ पानी पीती हुई एक लमहा के लिये रुक गई और आहिस्ता से बोली- “चुप चुप बहन! ये लोग दरअस्ल हमारी ही बातें करते हैं…”