Tag: Ankit Kumar Bhagat

Tribe, Village, Adivasi, Labour, Tribal, Poor

धरतीपुत्रों के बारे में

मैंने देखा है उन्हें शहरों से दूर, तराई वाले इलाक़ों और पहाड़ों की ऊँचाई पर बने घरों में वास करते। श्याम-वर्णित मुखड़े के पीछे उनकी दंतावलियाँ टिमटिमाती हैं— तारक-शृंखलाओं के सदृश, जैसे झरने...
People, Society, Faces

वर्गभेद और अतीत की ग़लतियाँ

दुनिया के कई हिस्सों में बनाए गए हैं नियम— निर्गत करने को विशेषाधिकार। निर्धारित हैं चंद कसौटियाँ जिनसे आँका जा सकता है फ़र्क़। शताब्दियों की ये क़वायदें समाजीकरण की नहीं...
Boy, Hunger, Kid, Hungry, Hope

त्रासद काल

"लोग घरों से ना निकलें टाल दिए जाएँ सारे आयोजन चेहरे ढँककर चलें सभी-जन।" सरकारी ऐलान हुआ है- हम सामाजिक-दूरी बनाना सीख लें कि सबकी भागीदारी से ही टाला जा सकेगा यह...
Kids, Kiss, Love, Field, Play, Bromance, Friend, Brother

जब आप प्रेम में होते हैं

'Jab Aap Prem Mein Hote Hain', a poem by Ankit Kumar Bhagat सूरज भी करता है प्रेम अपनी किरणों से, यद्यपि वह गोला है 'आग' का। जबकि वो...
Fist, Protest, Dissent

अंकित कुमार भगत की कविताएँ

Poems: Ankit Kumar Bhagat प्रतिरोध काले गुलाब और स्याह परछाइयों के बाद, कालिख पुती दीवारें इस दौर की विशेषताएँ हैं। अँधेरा गहराता ही जाता है, कि असहमतियों को आज़माने की इजाज़त नहीं यहाँ। विद्रोह...

सर्दियों में ‘तुम’

'Sardiyon Mein Tum', a poem by Ankit Kumar Bhagat तुम मेरे लिए सर्दियों की सुगबुगाहट जैसी हो। शरद पूर्णिमा के धवल चंद्र से.. बसंत पंचमी की सरसराती हवाओं...
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