कविताएँ | Poetry

‘उर्दू का स्यापा’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘उर्दू का स्यापा’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र अलीगढ़ इंस्टीट्यूट गजट और बनारस अखबार के देखने से ज्ञात हुआ कि बीबी उर्दू मारी गई और परम अहिंसानिष्ठ होकर भी राजा शिवप्रसाद ने यह हिंसा की– हाय हाय! Read more…

By Posham Pa, ago
निबन्ध | Essay

‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘भारतवर्षोन्नति कैसे हो सकती है’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र आज बड़े आनंद का दिन है कि छोटे से नगर बलिया में हम इतने मनुष्यों को एक बड़े उत्साह से एक स्थान पर देखते हैं। इस अभागे Read more…

By Posham Pa, ago
व्यंग्य | Satire

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र

‘एक प्रस्तवित स्कूल की नियमावली’ – भारतेंदु हरिश्चंद्र (लगभग सवा सौ साल पहले की बात है। इस लेखक ने देखा ‘एक अद्भुत अपूर्व स्वप्न’। स्वप्न में उसने बिचारा कि देह लीला समाप्त हो जाने के Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

जब भारतेन्दु हरिश्चंद्र ने लिखीं अंग्रेज़ों की प्रशंसा में कविताएँ

भारतेन्दु हरिश्चंद्र हिन्दी आधुनिक काल के प्रथम प्रमुख कवि माने जाते हैं। भारतेन्दु का कार्यकाल लगभग उसी समय का रहा जब 1857 की क्रांति के बाद भारत में ईस्ट इंडिया कम्पनी का राज ख़त्म हुआ Read more…

By Posham Pa, ago
ब्लॉग | Blog

हिन्दी मुकरी

नहीं नहीं, हिन्दी अपने किसी वादे से नहीं मुकरी है, यह तो एक हिन्दी विधा (form) है जो मुकरे हुए लोगों का सैंकड़ों साल बाद भी इंतज़ार कर रही है कि कब वो मुड़कर उसकी Read more…

By Puneet Kusum, ago

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