‘सवालों की किताब’ – III

अनुवाद: पुनीत कुसुम

बताओ मुझे, क्या गुलाब नग्न है
या यही उसकी एकमात्र पोशाक है?

क्यों छिपाते हैं वृक्ष
अपनी जड़ों का वैभव?

कौन सुनता है
चोर मोटरगाड़ियों के पछतावे?

बारिश में रुकी खड़ी एक ट्रेन से अधिक दुखद
इस दुनिया में कुछ है?