हमने
गुज़रे हुए समय को
मुट्ठी में क़ैद कर रखा है
और क्षितिज की ओर ताकते हुए
चुपचाप बैठे हैं

हम
कुछ सोचते हैं
पर कह नहीं पाते
और
व्यक्त हो जाते हैं वे
जिनका कोई
वास्ता तक नहीं होता

हम
जब हँसना चाहते हैं
तब इर्द-गिर्द का
माहौल देखकर
हमारी आँखों में
छलछला आता है पानी!

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