रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे

रुक गया आँख से बहता हुआ दरिया कैसे ग़म का तूफ़ाँ तो बहुत तेज़ था, ठहरा कैसे हर घड़ी तेरे ख़यालों में घिरा रहता हूँ मिलना चाहूँ...

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे

अब तो घबरा के ये कहते हैं कि मर जाएँगे मर के भी चैन न पाया तो किधर जाएँगे तुम ने ठहरायी अगर ग़ैर के घर जाने...

अभी आँखें खुली हैं और क्या-क्या देखने को

अभी आँखें खुली हैं और क्या-क्या देखने को मुझे पागल किया उसने तमाशा देखने को वो सूरत देख ली हम ने तो फिर कुछ भी न...

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से

समझ में ज़िन्दगी आए कहाँ से पढ़ी है ये इबारत दरमियाँ से यहाँ जो है तनफ़्फ़ुस ही में गुम है परिंदे उड़ रहे हैं शाख़-ए-जाँ से मकान-ओ-लामकाँ के...

तुझे खोकर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ

तुझे खोकर भी तुझे पाऊँ जहाँ तक देखूँ हुस्न-ए-यज़्दाँ से तुझे हुस्न-ए-बुताँ तक देखूँ तूने यूँ देखा है जैसे कभी देखा ही न था मैं तो दिल...

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है

मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है। सूर्य हमने भी नहीं देखा सुबह से, क्या करोगे, सूर्य का क्या देखना है। इस...

तवज्जोह तो अब ख़ैर क्या पाएँगे

ग़ज़लें : आलोक मिश्रा 1 तवज्जोह तो अब ख़ैर क्या पाएँगे मगर दिल की ख़ातिर चले जाएँगे भटकते रहेंगे तुम्हारे ही गिर्द निगाहों में लेकिन नहीं आएँगे कहाँ हैं अलग...

कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ

कुटिया में कौन आएगा इस तीरगी के साथ अब ये किवाड़ बंद करो ख़ामुशी के साथ साया है कम खजूर के ऊँचे दरख़्त का उम्मीद बाँधिए न...

दिल में इक लहर सी उठी है अभी

दिल में इक लहर-सी उठी है अभी कोई ताज़ा हवा चली है अभी कुछ तो नाज़ुक मिज़ाज हैं हम भी और ये चोट भी नई है अभी शोर...

आह जो दिल से निकाली जाएगी

आह जो दिल से निकाली जाएगी क्या समझते हो कि ख़ाली जाएगी इस नज़ाकत पर ये शमशीर-ए-जफ़ा आप से क्यूँकर सम्भाली जाएगी क्या ग़म-ए-दुनिया का डर मुझ रिंद...

जो उतरा फिर न उभरा, कह रहा है

जो उतरा फिर न उभरा, कह रहा है ये पानी मुद्दतों से बह रहा है मेरे अन्दर हवस के पत्थरों को कोई दीवाना कब से सह रहा है तकल्लुफ़...

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं, ख़फ़ा होते हैं

यूँ तो आपस में बिगड़ते हैं, ख़फ़ा होते हैं मिलने वाले कहीं उल्फ़त में जुदा होते हैं हैं ज़माने में अजब चीज़ मोहब्बत वाले दर्द ख़ुद बनते...

STAY CONNECTED

38,091FansLike
16,586FollowersFollow
22,311FollowersFollow
1,270SubscribersSubscribe

RECENT POSTS

Corona, Covid

उसकी आँखें खुली रहनी चाहिए थीं

(कोरोना से गुज़र गई एक अपरिचित की फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल से गुज़रते हुए) 8 मई, 2021 सत्ता है मछली की आँख और दोनों कर्ता-धर्ता अर्जुन और 'ठाकुर' बने थे चूक...
Usha Priyamvada

छुट्टी का दिन

पड़ोस के फ़्लैट में छोटे बच्चे के चीख़-चीख़कर रोने से माया की नींद टूट गई। उसने अलसाई पलकें खोलकर घड़ी देखी, पौने छह बजे...
Sudha Arora

अकेली औरत का हँसना

अकेली औरत ख़ुद से ख़ुद को छिपाती है। होंठों के बीच क़ैद पड़ी हँसी को खींचकर जबरन हँसती है और हँसी बीच रास्ते ही टूट जाती है... अकेली औरत...
Shamsher Bahadur Singh

चुका भी हूँ मैं नहीं

चुका भी हूँ मैं नहीं कहाँ किया मैनें प्रेम अभी। जब करूँगा प्रेम पिघल उठेंगे युगों के भूधर उफन उठेंगे सात सागर। किन्तु मैं हूँ मौन आज कहाँ सजे मैनें साज अभी। सरल से भी...
Franz Kafka, Milena Jesenska

मिलेना को लिखे काफ़्का के पत्रों के कुछ अंश

किताब अंश: 'लेटर्स टू मिलेना' अनुवाद: लाखन सिंह प्रिय मिलेना, काश! ऐसा हो कि दुनिया कल ख़त्म हो जाए। तब मैं अगली ही ट्रेन पकड़, वियना में...
Woman in front of a door

सुबह

कितना सुन्दर है सुबह का काँच के शीशों से झाँकना इसी ललछौंहे अनछुए स्पर्श से जागती रही हूँ मैं बचपन का अभ्यास इतना सध गया है कि आँखें खुल ही जाती...
Rohit Thakur

सोलेस इन मे

कौन आएगा मई में सांत्वना देने कोई नहीं आएगा समय ने मृत्यु का स्वांग रचा है अगर कोई न आए तो बारिश तुम आना आँसुओं की तरह दो-चार बूँदों की...
Fist, Protest, Dissent

एक छोटी-सी लड़ाई

मुझे लड़नी है एक छोटी-सी लड़ाई एक झूठी लड़ाई में मैं इतना थक गया हूँ कि किसी बड़ी लड़ाई के क़ाबिल नहीं रहा। मुझे लड़ना नहीं अब— किसी...
Saadat Hasan Manto

मंटो

मंटो के मुताल्लिक़ अब तक बहुत कुछ लिखा और कहा जा चुका है। उसके हक़ में कम और ‎ख़िलाफ़ ज़्यादा। ये तहरीरें अगर पेश-ए-नज़र...
Sahir Ludhianvi

ख़ून फिर ख़ून है

ज़ुल्म फिर ज़ुल्म है, बढ़ता है तो मिट जाता है ख़ून फिर ख़ून है, टपकेगा तो जम जाएगा ख़ाक-ए-सहरा पे जमे या कफ़-ए-क़ातिल पे जमे फ़र्क़-ए-इंसाफ़ पे...
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;-)