गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौ-बहार चले

गुलों में रंग भरे, बाद-ए-नौ-बहार चले चले भी आओ कि गुलशन का कारोबार चले क़फ़स उदास है यारो सबा से कुछ तो कहो कहीं तो बहर-ए-ख़ुदा आज...

ऐसा भी कोई सपना जागे

ऐसा भी कोई सपना जागे साथ मिरे इक दुनिया जागे वो जागे जिसे नींद न आए या कोई मेरे जैसा जागे हवा चली तो जागे जंगल नाव चले तो...

कचनार की टहनी

झुकी मन के गवाक्षों पर किसी कचनार की टहनी हमारे द्वार तक आयी किसी के द्वार की टहनी लदी जब लाल फूलों से, बुलाने लग गई...

दिल धड़कने का सबब याद आया

दिल धड़कने का सबब याद आया वो तिरी याद थी, अब याद आया आज मुश्किल था सम्भलना ऐ दोस्त तू मुसीबत में अजब याद आया दिन गुज़ारा था बड़ी...

धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है

धूप ये अठखेलियाँ हर रोज़ करती है एक छाया सीढ़ियाँ चढ़ती-उतरती है यह दिया चौरास्ते का ओट में ले लो आज आँधी गाँव से होकर गुज़रती है कुछ...

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं

सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उसके शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं सुना है रब्त है उस को ख़राब-हालों...

ख़ंजर चमका, रात का सीना चाक हुआ

ख़ंजर चमका, रात का सीना चाक हुआ जंगल-जंगल सन्नाटा सफ़्फ़ाक हुआ ज़ख़्म लगाकर उसका भी कुछ हाथ खुला मैं भी धोका खाकर कुछ चालाक हुआ मेरी ही परछाईं...

सीने में जलन, आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यूँ है दिल है तो धड़कने का बहाना कोई ढूँढे पत्थर...

किसको देखा है, ये हुआ क्या है

किसको देखा है, ये हुआ क्या है दिल धड़कता है, माजरा क्या है इक मोहब्बत थी, मिट चुकी या रब तेरी दुनिया में अब धरा क्या है दिल...

उनसे नयन मिला के देखो

उनसे नयन मिला के देखो ये धोखा भी खा के देखो दूरी में क्या भेद छुपा है इसका खोज लगा के देखो किसी अकेली शाम की चुप में गीत पुराने...

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता कहीं ज़मीन, कहीं आसमाँ नहीं मिलता तमाम शहर में ऐसा नहीं ख़ुलूस न हो जहाँ उमीद हो इसकी, वहाँ नहीं...

मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ रहे हैं

मोहब्बत में ये क्या मक़ाम आ रहे हैं कि मंज़िल पे हैं और चले जा रहे हैं ये कह-कहके हम दिल को बहला रहे हैं वो अब...

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पेटपोंछना

दराज़ में रखी नींद की गोलियों से भरी शीशी को मैंने फिर से देखा, थोड़ी देर देखता रहा... फिर धीरे से दराज़ बंद कर दी।...
Alok Dhanwa

भागी हुई लड़कियाँ

1 घर की ज़ंजीरें कितना ज़्यादा दिखायी पड़ती हैं जब घर से कोई लड़की भागती है क्या उस रात की याद आ रही है जो पुरानी फ़िल्मों में बार-बार आती थी जब...
Harivanshrai Bachchan

प्रश्न मेरे, उत्तर बच्चन के

साक्षात्कार: हरिवंशराय बच्चन (बच्चन रचनावली खंड 9 से) साक्षात्कारकर्ता: कुमारी विभा सक्सेना, 1979 प्रश्न— आपने अपनी आत्मकथा के प्रथम भाग 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ' में...
Amarkant

एक थी गौरा

लम्बे क़द और डबलंग चेहरे वाले चाचा रामशरण के लाख विरोध के बावजूद आशू का विवाह वहीं हुआ। उन्होंने तो बहुत पहले ही ऐलान...
Dagh Dehlvi

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था

तुम्हारे ख़त में नया इक सलाम किसका था न था रक़ीब तो आख़िर वो नाम किसका था वो क़त्ल करके मुझे हर किसी से पूछते हैं ये...
Woman, River

यह नदी

यह नदी रोटी पकाती है हमारे गाँव में। हर सुबह नागा किए बिन सभी बर्तन माँजकर, फिर हमें नहला-धुलाकर नैन ममता आँजकर यह नदी अंधन चढ़ाती है हमारे गाँव में। सूखती-सी क्यारियों में फूलगोभी बन हँसे, गंध धनिए में सहेजे, मिर्च...
Murdahiya - Tulsiram

तुलसीराम: ‘मुर्दहिया’ व ‘मणिकर्णिका’

मुर्दहिया "हम अंजुरी मुँह से लगाए झुके रहते, और वे बहुत ऊपर से चबूतरे पर खड़े-खड़े पानी गिराते। वे पानी बहुत कम पिलाते थे किंतु...
Jaishankar Prasad

अरे कहीं देखा है तुमने

अरे कहीं देखा है तुमने मुझे प्यार करने वालों को? मेरी आँखों में आकर फिर आँसू बन ढरने वालों को? सूने नभ में आग जलाकर यह सुवर्ण-सा हृदय गलाकर जीवन-संध्या...
Dushyant Kumar

साहित्य सत्ता की ओर क्यों देखता है?

यह एक अजीब बात है कि इधर साहित्यकार में शिकवों और शिकायतों का शौक़ बढ़ता जा रहा है। उसे शिकायत है कि गवर्नर और...
Adarsh Bhushan

मनुष्यता की होड़

ग्रीष्म से आकुल सबसे ज़्यादा मनुष्य ही रहा ताप न झेला गया तो पहले छाँव तलाशी फिर पूरी जड़ से ही छाँव उखाड़ ली विटप मौन में अपनी हत्या के मूक साक्षी...
Om Prakash Valmiki

तब तुम क्या करोगे?

यदि तुम्हें धकेलकर गाँव से बाहर कर दिया जाए पानी तक न लेने दिया जाए कुएँ से दुत्कारा-फटकारा जाए चिलचिलाती दोपहर में कहा जाए तोड़ने को पत्थर काम के बदले दिया जाए खाने...
Noon Meem Rashid

ज़िन्दगी से डरते हो

ज़िन्दगी से डरते हो! ज़िन्दगी तो तुम भी हो, ज़िन्दगी तो हम भी हैं! ज़िन्दगी से डरते हो? आदमी से डरते हो आदमी तो तुम भी हो, आदमी...
Human sitting on flower

चंदन गंध

चंदन है तो महकेगा ही आग में हो या आँचल में छिप न सकेगा रंग प्यार का चाहे लाख छिपाओ तुम, कहने वाले सब कह देंगे कितना ही भरमाओ...
Shail Chaturvedi

मूल अधिकार?

क्या कहा—चुनाव आ रहा है? तो खड़े हो जाइए देश थोड़ा बहुत बचा है उसे आप खाइए। देखिए न, लोग किस तरह खा रहे हैं सड़के, पुल और फ़ैक्ट्रियों तक को पचा...
Jyotsna Milan

रात

सबसे पहले शुरू होता है माँ का दिन मुँह अंधेरे और सबके बाद तक चलता है छोटी होती हैं माँ की रातें नियम से और दिन नियम से लम्बे रात में दूर तक...
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वह किसान औरत नींद में क्या देखती है? वह शायद देखती है अपने तन की धरती नींद में वह शायद देखती है पसीने से भरा एक...
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देश-प्रेम

कोई नहीं देता साथ, सभी लोग युद्ध और देश-प्रेम की बातें करते हैं। बड़े-बड़े नारे लगाते हैं। मुझसे बोला भी नहीं जाता। जब लोग घंटों राष्ट्र के नाम...
Ismat Chughtai - Urdu writer

जवानी

जब लोहे के चने चब चुके तो ख़ुदा ख़ुदा करके जवानी बुख़ार की तरह चढ़नी शुरू हुई। रग-रग से बहती आग का दरिया उमड़...
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मुक्तिबोध की याद

हाँ, सितम्बर का महीना हर साल हमें मुक्तिबोध की याद दिलाएगा—क्योंकि गत वर्ष इसी महीने उनका देहांत हुआ। जून के महीने में जब वे...
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आओ, चलें हम

आओ, चलें हम साथ दो क़दम हमक़दम हों दो ही क़दम चाहे दुनिया की क़दमताल से छिटक हाथ कहाँ लगते हैं मित्रों के हाथ घड़ी-दो घड़ी को घड़ीदार हाथ—जिनकी कलाई की...
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