रेप क्या होता है?

"आज एक और रेप हुआ हमारे ज़िले में!" दोस्त ख़बर पढ़ ही रहा था कि मैं और मेरे कुछ साथी कहने लगे - "यार ग़लती इन्हीं...

तीन अल्फ़ाज़

लकड़ी का दरवाज़ा खोलकर इक परछाई आँगन में दाख़िल हुई। थैला ज़मीं पर फेंका और दीवार पर सिर टिकाकर दम भर साँस ली। वहीं...

फल : एक बहस

"सम्पूर्ण स्टाफ के लिए एक क्रांतिकारी निर्णय लिया गया कि अब से हम मध्यावकाश (रिसेस) में चाय की जगह मौसमी फल खाया करेंगें। चाय क्लब की जगह फ्रूट क्लब बना दिया गया।"

लड़की की काठी

दीपा और मुकुल दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे। दोनों एक साथ एक ही कॉलेज से एम.ए. कर रहे थे। इतना प्यार...

बुलबुले

ऐसी बारिश पहले कभी नहीं हुई थी। बादलों की गड़गड़ाहट से लग रहा था जैसे धरती जलमग्न हो जाएगी। बारिश बहुत भयानक और तेज...

एक कटोरी साग

"रेणु को एक नई बात भी पता चली कि उसने देखा कि नानी एक कटोरी साग भरकर बिमला नानी (पड़ोसन) के घर देने जा रही है। जब नानी वापस आई तो उनके हाथ में दूसरी कटोरी थी जिसमें तोरी का साग था। आकर नानी ने बताया कि बेट्टी यहाँ तो यो सब चालता रहवै सै, कदै वा साग दे जा तो कदे हम दे आवै।"

अभागी का स्वर्ग

सात दिनों तक ज्वरग्रस्त रहने के बाद ठाकुरदास मुखर्जी की वृद्धा पत्नी की मृत्यु हो गई। मुखोपाध्याय महाशय अपने धान के व्यापार से काफी...

जायज़ इस्तेमाल

दस राउंड चलाने और तीन आदमियों को ज़ख़्मी करने के बाद पठान भी आख़िर सुर्ख़रु हो ही गया। एक अफ़रा तफ़री मची थी। लोग...

मिलन

"मुझे तो पानी से प्रेम हो गया है। किसी दिन जब जोर का मेघ बरसेगा तब झरने के नीचे खड़ी हो जाऊँगी; आकाश का पानी, झरने का पानी और नदी का पानी, हर ओर पानी। फिर इतना पानी पी लूँगी कि मैं भी गल कर पानी हो जाऊँगी।"

तोहफ़ा

मैंने उन्हें कई तोहफे दिए। हमारे साथ के चार सालों में ऐसे बहुत मौक़े आते कि मुझे उन्हें तोहफे देने की ज़िद पकड़नी पड़ती लेकिन ऐसा...

नैना

असफलता के क्रूर प्रहारों ने इतनी चोट कभी नहीं पहुंचाई थी जितनी नैना के चले जाने ने। निशांत के निःसार जीवन की सरसता शहरों...

परियों की बातें

मैं अपने दोस्त के पास बैठा था। उस वक़्त मेरे दिमाग़ में सुक़्रात का एक ख़याल चक्कर लगा रहा था— क़ुदरत ने हमें दो...

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RECENT POSTS

Silent, Quiet, Silence, Woman, Shut, Do not speak, Taboo

अंधेरे के नाख़ून

एक छोर से चढ़ता आता है रोशनी को लीलता हुआ एक ब्लैक होल, अंधेरे का नश्तर चीर देता है आसमान का सीना, और बरस पड़ता है बेनूर...
Adarsh Bhushan

लाठी भी कोई खाने की चीज़ होती है क्या?

हमारे देश में लाठियाँ कब आयीं यह उचित प्रश्न नहीं कहाँ से आयीं यह भी बेहूदगी भरा सवाल होगा लाठियाँ कैसे चलीं कहाँ चलीं कहाँ से कहाँ तक चलीं क्या पाया...
Raghuvir Sahay

चेहरा

चेहरा कितनी विकट चीज़ है जैसे-जैसे उम्र गुज़रती है वह या तो एक दोस्त होता जाता है या तो दुश्मन देखो, सब चेहरों को देखो पहली बार जिन्हें...
Kumar Ambuj

कुछ समुच्चय

स्मृति की नदी वह दूर से बहती आती है, गिरती है वेग से उसी से चलती हैं जीवन की पनचक्कियाँ वसंत-1 दिन और रात में नुकीलापन नहीं है मगर...
Gaurav Bharti

हम मारे गए

हमें डूबना ही था और हम डूब गए हमें मरना ही था और हम मारे गए हम लड़ रहे थे कई स्तरों पर लड़ रहे थे हमने निर्वासन का दंश...
Rahul Sankrityayan

तुम्हारे धर्म की क्षय

वैसे तो धर्मों में आपस में मतभेद है। एक पूरब मुँह करके पूजा करने का विधान करता है, तो दूसरा पश्चिम की ओर। एक...
Melancholy, Sadness, Night

लाखन सिंह की कविताएँ

1 जीना किसी सड़ी लाश को खाने जैसा हो गया है, हर एक साँस के साथ निगलता हूँ उलझी हुई अंतड़ियाँ, इंद्रियों से चिपटा हुआ अपराधबोध घिसटता है माँस के लोथड़े...
Abstract, Head, Human

शिवम तोमर की कविताएँ

रोटी की गुणवत्ता जिस गाय को अम्मा खिलाती रहीं रोटियाँ और उसका माथा छूकर माँगती रहीं स्वर्ग में जगह अब घर के सामने आकर रम्भियाती रहती है अम्मा ने तो खटिया...
Agyeya

युद्ध-विराम

नहीं, अभी कुछ नहीं बदला है। अब भी ये रौंदे हुए खेत हमारी अवरुद्ध जिजिविषा के सहमे हुए साक्षी हैं; अब भी ये दलदल में फँसी हुई मौत की मशीनें उनके...
Rahul Boyal

जब तुम समझने लगो ज़िन्दगी

वो जहाँ पर मेरी नज़र ठहरी हुई है वहाँ ग़ौर से देखो तुम तुम भी वहाँ हो मेरे साथ मेरे दाएँ हाथ की उँगलियों में उलझी हुई हैं...
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