दस राउंड चलाने और तीन आदमियों को ज़ख़्मी करने के बाद पठान भी आख़िर सुर्ख़रु हो ही गया।

एक अफ़रा तफ़री मची थी। लोग एक दूसरे पर गिर रहे थे। छीना-झपटी हो रही थी। मार-धाड़ भी जारी थी। पठान अपनी बंदूक लिए घुसा और तक़रीबन एक घंटा कुश्ती लड़ने के बाद थर्मस बोतल पर हाथ साफ़ करने में कामयाब हो गया।

पुलिस पहुंची तो सब भागे… पठान भी।

एक गोली उसके दाहिने कान को चाटती हुई निकल गई। पठान ने उसकी बिल्कुल परवाह की और सुर्ख़ रंग की थर्मस बोतल को अपने हाथ में मज़बूती से थामे रखा।

अपने दोस्तों के पास पहुंच कर उसने सब को बड़े फ़ख़्रिया अंदाज़ में थर्मस बोतल दिखाई। एक ने मुस्कुरा कर कहा, “ख़ान साहब आप ये क्या उठा लाए हैं।”

ख़ान साहब ने पसंदीदा नज़रों से बोतल के चमकते हुए ढकने को देखा और पूछा, “क्यूँ?”

“ये तो ठंडी चीज़ें ठंडी और गर्म चीज़ें गर्म रखने वाली बोतल है।”

ख़ान साहब ने बोतल अपनी जेब में रख ली। “खू ,अम इसमें निस्वार डालेगा… गर्मियों में गर्म रहेगी। सर्दियों में सर्द!”

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सआदत हसन मंटो
सआदत हसन मंटो (11 मई 1912 – 18 जनवरी 1955) उर्दू लेखक थे, जो अपनी लघु कथाओं, बू, खोल दो, ठंडा गोश्त और चर्चित टोबा टेकसिंह के लिए प्रसिद्ध हुए। कहानीकार होने के साथ-साथ वे फिल्म और रेडिया पटकथा लेखक और पत्रकार भी थे। अपने छोटे से जीवनकाल में उन्होंने बाइस लघु कथा संग्रह, एक उपन्यास, रेडियो नाटक के पांच संग्रह, रचनाओं के तीन संग्रह और व्यक्तिगत रेखाचित्र के दो संग्रह प्रकाशित किए।

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