जिसने भी उछाला होगा
आसमान में पहला पत्थर,
और तबियत से जो उछाला होगा
आसमान में पहला पत्थर,
पत्थर ने सुराख़ तो बिलकुल नहीं किया होगा।

किसी ज़रूरतमंद और भूखे इंसान ने
बिलबिलाते पेट और काँपते हाथों से
उछाला होगा आसमान में पहला पत्थर,
ईश्वर को याद दिलाने के लिए
कि शायद वो भूल गया है
उसने किया था वादा
वो भरेगा भूखों के पेट
और नहीं माँगेगा बदले में
उनसे उनकी इज़्ज़त।

या फिर किसी नास्तिक ने उछाला होगा
आसमान में पहला पत्थर, ये जताने
कि आसमान में होते हैं सिर्फ सफ़ेद बादल
और नीला पानी
कुछ रंग और कुछ धूप।

विज्ञान के उछाले पत्थर
आसमान को चीर देते हैं अन्त तक
दाग छोड़ देते हैं
ईश्वर के अस्तित्व पर
प्रश्न लगा देते हैं
उसके सर्वव्यापी होने पर।

बेबसों और भूखों के पत्थर
वापस गिर पड़ते हैं उनके सर पर
और ईश्वर दे देता है उन्हें मुक्ति
अन्ततः।

प्रश्न करने वाले
ईश्वर को नहीं मारा करते
ईश्वर मार देता है
प्रश्न करने वालों को।

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