Tag: Ghazal by Meena Kumari
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
टुकड़े-टुकड़े दिन बीता, धज्जी-धज्जी रात मिली
जिसका जितना आँचल था, उतनी ही सौगात मिली
रिमझिम-रिमझिम बूँदों में, ज़हर भी है और अमृत भी
आँखें हँस दीं दिल...
