Tag: Hindi Katha

Mridula Garg

बाल गुरु

लड़का तब चौथी कक्षा में पढ़ता था। इतिहास की क्लास चल रही थी। टीचर बोल रही थी कि बस बोल रही थी। ज्ञानवर्द्धक अच्छी-अच्छी...
Love, Couple, Shakespeare, Play

मगर शेक्सपियर को याद रखना

"खुशी के दिन आसमान पर नए चाँद को जन्म देंगे, लेकिन ये पुराना चाँद घटने में कितनी देर लगा रहा है, इसने मेरी ख्वाहिशात को कुछ इस तरह रोक रखा है, जैसे कोई सौतेली माँ या रईस बेवा एक नौजवान के प्रेम पर पाबंदी लगा दे..।" "चालाक नवयुवक स्वाभाविक रूप से घृणा से भरे हुए ही होते हैं। वे शिकायत करते-करते थक जाते हैं कि दुनिया उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं करती। वे कुछ देना चाहते हैं पर कोई लेना नहीं चाहता। वे प्रसिद्धि पाने के लिए आतुर होते हैं पर वह उनके रास्ते आते नहीं दिखती।"
kutte ki poonchh - yashpal

कुत्ते की पूँछ

"मनुष्यता का चस्का एक दफे लग जाने पर किसी को जानवर बनाये रखना भी तो सम्भव नहीं।" क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ है कि किसी से दोस्ती करके या किसी को अपने जीवन में जगह देकर आपने बड़ा महसूस किया हो? और बाद में उस व्यक्ति के आपसे खुलते जाने पर आपको अफ़सोस भी हुआ हो? यदि हाँ, तो यह कहानी बेसब्री से आपका इंतज़ार कर रही है!

टोबा टेक सिंह

'टोबा टेक सिंह' - सआदत हसन मंटो बंटवारे के दो-तीन साल बाद पकिस्तान और हिंदुस्तान की सरकारों को ख्याल आया कि साधारण कैदियों की तरह...
haar ki jeet sudarshan

हार की जीत

'हार की जीत' - सुदर्शन माँ को अपने बेटे और किसान को अपने लहलहाते खेत देखकर जो आनंद आता है, वही आनंद बाबा भारती को...

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Faiz Ahmad Faiz

पास रहो

तुम मेरे पास रहो मेरे क़ातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो जिस घड़ी रात चले, आसमानों का लहू पी के सियह रात चले मरहम-ए-मुश्क लिए, नश्तर-ए-अल्मास लिए बैन करती हुई, हँसती...
Swayam Prakash

पिताजी का समय

अपने घर में मैं परम स्वतंत्र था। जैसे चाहे रहता, जो चाहे करता। मर्ज़ी आती जहाँ जूते फेंक देता, मन करता जहाँ कपड़े। जगह-जगह...
Neem Tree

तेरे वाला हरा

चकमक, जनवरी 2021 अंक से कविता: सुशील शुक्ल  नीम तेरी डाल अनोखी है लहर-लहर लहराए शोखी है नीम तेरे पत्ते बाँके हैं किसने तराशे किसने टाँके हैं नीम तेरे फूल बहुत झीने भीनी ख़ुशबू शक्ल से पश्मीने नीम...
Saadat Hasan Manto

चोर

मुझे बेशुमार लोगों का क़र्ज़ अदा करना था और ये सब शराबनोशी की बदौलत था। रात को जब मैं सोने के लिए चारपाई पर...
God, Abstract Human

होने की सुगन्ध

यही तो घर नहीं और भी रहता हूँ जहाँ-जहाँ जाता हूँ, रह जाता हूँ जहाँ-जहाँ से आता हूँ, कुछ रहना छोड़ आता हूँ जहाँ सदेह गया नहीं वहाँ...
Kumar Vikal

इश्तहार

इसे पढ़ो इसे पढ़ने में कोई डर या ख़तरा नहीं है यह तो एक सरकारी इश्तहार है और आजकल सरकारी इश्तहार दीवार पर चिपका कोई देवता या अवतार...
Morning, Sky, Birds, Sunrise, Sunset

इति नहीं होती

धीर धरना राग वन से रूठकर जाना नहीं पाँखी। फिर नए अँखुए उगेंगे इन कबन्धों में, यह धुँआ कल बदल सकता है सुगन्धों में, आस करना कुछ कटे सिर देख घबराना...
Kumar Ambuj

एक कम है

अब एक कम है तो एक की आवाज़ कम है एक का अस्तित्व, एक का प्रकाश एक का विरोध एक का उठा हुआ हाथ कम है उसके मौसमों के...
Abstract, Time

कहो तो

कहो तो 'इन्द्रधनुष' ख़ून-पसीने को बिना पोंछे दायीं ओर भूख से मरते लोगों का मटमैले आसमान-सा विराट चेहरा बायीं ओर लड़ाई की ललछौंही लपेट में दमकते दस-बीस साथी उभरकर आएगा ठीक तभी सन्नाटे...
Mitro Marjani - Krishna Sobti

कृष्णा सोबती – ‘मित्रो मरजानी’

कृष्णा सोबती के उपन्यास 'मित्रो मरजानी' से उद्धरण | Quotes from 'Mitro Marjani', a Hindi novel by Krishna Sobti   "इस देह से जितना जस-रस ले...
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