Tag: Jaan Nisaar Akhtar

Jaan Nisar Akhtar

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर

हम ने काटी हैं तेरी याद में रातें अक्सर दिल से गुज़री हैं सितारों की बरातें अक्सरऔर तो कौन है जो मुझको तसल्ली देता हाथ रख...
Jaan Nisar Akhtar

अच्छा है उनसे कोई तक़ाज़ा किया न जाए

अच्छा है उनसे कोई तक़ाज़ा किया न जाए अपनी नज़र में आप को रुस्वा किया न जाएहम हैं, तेरा ख़याल है, तेरा जमाल है इक पल...
Jaan Nisar Akhtar

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं

अशआर मेरे यूँ तो ज़माने के लिए हैं कुछ शेर फ़क़त उनको सुनाने के लिए हैंअब ये भी नहीं ठीक कि हर दर्द मिटा दें कुछ...
Jaan Nisar Akhtar

तजज़िया

मैं तुझे चाहता नहीं लेकिन फिर भी जब पास तू नहीं होती ख़ुद को कितना उदास पाता हूँ गुम-से अपने हवास पाता हूँ जाने क्या धुन समायी रहती है इक...
Jaan Nisar Akhtar

आख़िरी मुलाक़ात

'Aakhiri Mulaqat' Jaan Nisaar Akhtar मत रोको इन्हें पास आने दो ये मुझ से मिलने आए हैं मैं ख़ुद न जिन्हें पहचान सकूँ कुछ इतने धुँधले साए हैं दो पाँव...
Jaan Nisar Akhtar

गर्ल्स कॉलेज की लारी

"उसकी एक पंक्ति 'कमबख़्त ने गाने न दिया एक भी गाना' गर्ल्स कॉलेज में इतनी मक़बूल हुई कि स्थायी रूप से लड़कियों की उस सुपरवाइजर का संक्षिप्त नाम (Nickname) 'कमबख़्त' पड़ गया।"

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RECENT POSTS

Uski Roti - Mohan Rakesh

उसकी रोटी

बालो को पता था कि अभी बस के आने में बहुत देर है, फिर भी पल्ले से पसीना पोंछते हुए उसकी आँखें बार-बार सड़क...
Abstract, Time

चींटी और मास्क वाले चेहरे

स्वप्न में दिखती है एक चींटी और मास्क वाले चेहरे चींटी रेंगती है पृथ्वी की नाल के भीतर मास्क वाले चेहरे घूमते हैं भीड़ मेंसर से...
Abstract, Woman

जीवन सपना था, प्रेम का मौन

जीवन सपना था आँखें सपनों में रहीं और सपने झाँकते रहे आँखों की कोर से यूँ रची हमने अपनी दुनिया जैसे बचपन की याद की गईं कविताएँ हमारा दुहराया...
Kedarnath Singh

फ़र्क़ नहीं पड़ता

हर बार लौटकर जब अन्दर प्रवेश करता हूँ मेरा घर चौंककर कहता है 'बधाई'ईश्वर यह कैसा चमत्कार है मैं कहीं भी जाऊँ फिर लौट आता हूँसड़कों पर परिचय-पत्र माँगा...
Naveen Sagar

वह मेरे बिना साथ है

वह उदासी में अपनी उदासी छिपाए है फ़ासला सर झुकाए मेरे और उसके बीच चल रहा हैउसका चेहरा ऐंठी हुई हँसी के जड़वत् आकार में दरका है उसकी आँखें बाहर...
Nurit Zarchi

नूइत ज़ारकी की कविता ‘विचित्रता’

नूइत ज़ारकी इज़राइली कवयित्री हैं जो विभिन्न साहित्य-सम्बन्धी पुरस्कारों से सम्मानित हैं। प्रस्तुत कविता उनकी हीब्रू कविता के तैल गोल्डफ़ाइन द्वारा किए गए अंग्रेज़ी...
Sunset

कितने प्रस्थान

सूरज अधूरी आत्महत्या में उड़ेल आया दिन-भर का चढ़ना उतरते हुए दृश्य को सूर्यास्त कह देना कितना तर्कसंगत है यह संदेहयुक्त है अस्त होने की परिभाषा में कितना अस्त हो जाना दोबारा...
Naresh Mehta

कवच

मैं जानता हूँ तुम्हारा यह डर जो कि स्वाभाविक ही है, कि अगर तुम घर के बाहर पैर निकालोगे तो कहीं वैराट्य का सामना न हो जाए, तुम्हें...
Vishesh Chandra Naman

मैं

मैं एक तीर था जिसे सबने अपने तरकश में शामिल किया किसी ने चलाया नहींमैं एक फूल था टूटने को बेताब सबने मुझे देखा, मेरे रंगों की तारीफ़ की और मैं...
Gaurav Bharti

कविताएँ: नवम्बर 2021

यात्री भ्रम कितना ख़ूबसूरत हो सकता है? इसका एक ही जवाब है मेरे पास कि तुम्हारे होने के भ्रम ने मुझे ज़िन्दा रखातुम्हारे होने के भ्रम में मैंने शहर...
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