Tag: Sachchidananda Vatsyayan Agyeya

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जो पुल बनाएँगे

जो पुल बनाएँगे वे अनिवार्यतः पीछे रह जाएँगे। सेनाएँ हो जाएँगी पार मारे जाएँगे रावण जयी होंगे राम, जो निर्माता रहे इतिहास में बन्दर कहलाएँगे! अज्ञेय की कविता 'घृणा का गान' Book by Agyeya:
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मैंने आहुति बनकर देखा

मैं कब कहता हूँ जग मेरी दुर्धर गति के अनुकूल बने, मैं कब कहता हूँ जीवन-मरू नन्दन-कानन का फूल बने? काँटा कठोर है, तीखा है, उसमें...
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रोज (गैंग्रीन)

अखबार के एक टुकड़े को पढ़ने और घड़ी में कितना बज गया है यह दोहराने जैसी मामूली चीजों के पीछे का मनोविज्ञान क्या-क्या अर्थ रख सकता है, यह अज्ञेय अपनी कहानी 'रोज़' में दिखाते हैं। बेहद सपाट कथानक किन्तु मनोचित्त की बेहद उलझी हुई गुत्थियाँ। ज़रूर पढ़िए! :)

‘क्योंकि मैं उसे जानता हूँ’ से कविताएँ

वेध्य पहले मैं तुम्हें बताऊँगा अपनी देह का प्रत्येक मर्मस्थल फिर मैं अपने दहन की आग पर तपा कर तैयार करूँगा एक धारदार चमकीली कटार जो मैं तुम्हें दूँगा फिर...
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