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U. R. Ananthamurthy

माँ

"रात होते ही ख़ूँख़ार जानवर घूमने लगते थे। फिर भी उस क्रूर माँ ने बच्चे के पूरी रोटी के लिए ज़िद करने पर उसे आँगन...
U. R. Ananthamurthy

कामरूपी

स्मृति के सुखद झरोखों में झाँकें तो हिटलर अपनी माँ से बहुत प्यार करता था। पत्नी के मरते समय स्टालिन दुख में अकेला पड़ गया था। महान दुष्ट राजा चिक्कवीर राजेंद्र ने भी बुढ़िया से पूछा था, 'दादी, मैंने तुम्हारे किस कान में बचपन में मूता था?' हेलन अभी कच्ची उमर की ही है। शीशे के सामने अठखेलियाँ करती नाच रही है। सड़क के आवारा छोकरों को देख कर डांस के सीखे स्टेप्स करते हुए उसे अपने शरीर की थिरकन निहारना सुखद लगता है; वह निर्लज्ज-सी सोच रही है कि उसकी ओर कोई क्यों नहीं देखता। वह एक-चौथाई बच्ची भले ही हो, पर तीन हिस्से तो स्त्री ही है। नाज-नखरों और अदाओं वाली इस लड़की की एकाग्रता को भंग न करें, आगे वह एक पूरी नागरिकता को ही भस्म कर डालने की शिक्षा पा रही है।
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