तुम कुछ खास हो

पेड़ों सी झूमती, खिलखिलाती
गुलमोहर सी रंगों को बिखेरती
मई के महीने में खिलती हुई अमलताश हो
तुम कुछ खास हो।

मेरी भावनाओं को लपेटती
सहेजती, समेटती
मेरी श्वास, मेरे होने का एहसास हो
तुम कुछ खास हो।

तुम मेरे विचारों की दुविधा
उनमें उपजे मतभेद और विविधता
मेरी अंतरात्मा की आवाज
और मेरा दृढ़ विश्वास हो
तुम कुछ खास हो।

जब से तुम आई मेरी जिंदगी में
हमेशा मेरे करीब, मेरे पास हो
मेरे जीवन का प्रवाह हो
मेरी धरती, मेरा आकाश हो
तुम कुछ खास हो।