मुद्रास्फीति के दौर में
एक मैं भी हूँ… कहीं छिपा हुआ
जिसका दाम बाज़ार में
सबसे धीमा बढ़ रहा है… तुम्हारे ढूंढने तक

तुम अब भी उतनी ही आसानी से मोल सकती हो मुझे
जैसे बिक जाता था मैं अकेला तुम्हारे पास
मंदियों के दौर में…

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विशेष चंद्र ‘नमन’
विशेष चंद्र नमन दिल्ली विवि, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज से गणित में स्नातक हैं। कॉलेज के दिनों में साहित्यिक रुचि खूब जागी, नया पढ़ने का मौका मिला, कॉलेज लाइब्रेरी ने और कॉलेज के मित्रों ने बखूबी साथ निभाया, और बीते कुछ वर्षों से वह अधिक सक्रीय रहे हैं। अपनी कविताओं के बारे में विशेष कहते हैं कि अब कॉलेज तो खत्म हो रहा है पर कविताएँ बची रह जाएँगी और कविताओं में कुछ कॉलेज भी बचा रह जायेगा। विशेष फिलहाल नई दिल्ली में रहते हैं।

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