पुराने मकान

पुराने मकानों के किवाड़ मत खोलो

सफ़ेद चादरों पे जमी धूल के नीचे
दफ़न, तुम्हारी यादें अभी
साँसें ले रही हैं…

हिज़्र की रातों के कोनो में तन्हा
सिसकियाँ सुनाई देंगी…

रोशनदान से रिसते जज़्बात
की रोशनी से आँखें चुंधिया जायेंगी

यादों की दीमक ताक पर रखी
ज़िन्दगी की पुरानी किताबों को खा गयी है

पुराने मकानों के किवाड़ मत खोलो!