मैंने देखा है
ज्ञान का संवाद करते
ग्रंथों की विक्षिप्तता,
होश में चलते लोगों का
सड़कों पर
बेहोश हो जाना,
बुझे चूल्हे पर
सिकती रोटियाँ,
उबलते पानी में रह जाना
चावलों का अधपका,
और देखा है
भीगती देह में
एक सूखा मन…

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