जब कभी
खूब तन्हाई में, मैं तुम्हें आवाज़ दूँ
तो तुम सुनना,
एक बच्चे को माँ की तरह।

जब मैं लड़ते-लड़ते थक जाऊँ
तो तुम हमेशा मेरे पीछे खड़े रहना,
बिल्कुल दुआओं की तरह।

तुम मुझे कभी प्यार मत करना
अगर मैं इसके काबिल नही हूँ,
मुझे समझना एक अमित्रघात की तरह।

पर जब मैं कभी
नफरत करने लगूँ सारी दुनिया से
तो तुम आना
मुझे समझना
मुझे बताना
ये दुनिया नफरत से नहीं,
प्यार से बचायी जा सकती है।

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अशोक सिंह 'अश्क'
अशोक सिंह 'अश्क' काशी हिंदू विश्व विद्यालय वाराणसी मोबाइल न० 8840686397, 9565763779 ईमेल [email protected] com

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