Tag: Criticism

Om Purohit Kagad

कविता सपनों की

वर्ण-वर्ण संजोकर गढ़ी थी मैंने अपने सपनों की कविता। परन्तु कितनी निर्दयता से किया पोस्ट्मार्टम कथित विशेषज्ञों ने, पंक्तियाँ वाक्य शब्द बिखेर कर परखे गए। मुझे दुःख न हुआ दुःख तो तब हुआ जब— शब्दों का संधिविच्छेद कर उन...
Sharad Joshi

आलोचना

"लेखक विद्वान हो न हो, आलोचक सदैव विद्वान होता है। विद्वान प्रायः भोण्डी बेतुकी बात कह बैठता है। ऐसी बातों से साहित्य में स्थापनाएँ...
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