Tag: Dharmvir Bharti

Dharmvir Bharati

थके हुए कलाकार से

सृजन की थकन भूल जा देवता अभी तो पड़ी है धरा अधबनी! अभी तो पलक में नहीं खिल सकी नवल कल्पना की मधुर चाँदनी, अभी अधखिली ज्योत्सना की...
Gunahon Ka Devta - Dharmvir Bharti

धर्मवीर भारती – ‘गुनाहों का देवता’

धर्मवीर भारती के उपन्यास 'गुनाहों का देवता' से उद्धरण | Quotes from 'Gunahon Ka Devta', a novel by Dharmvir Bharti   "सचमुच लगता है कि प्रयाग...
Dharmvir Bharati

क्या इनका कोई अर्थ नहीं

ये शामें, सब की सब शामें जिनमें मैंने घबराकर तुमको याद किया जिनमें प्यासी सीपी-सा भटका विकल हिया जाने किस आने वाले की प्रत्याशा में ये शामें क्या इनका...
Dharmvir Bharati

उदास तुम

तुम कितनी सुन्दर लगती हो जब तुम हो जाती हो उदास! ज्यों किसी गुलाबी दुनिया में सूने खण्डहर के आसपास मदभरी चाँदनी जगती हो! मुँह पर ढँक लेती हो...

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Recent Posts

Suresh Jinagal

सुरेश जिनागल की कविताएँ: अक्टूबर 2020

ललेश्वरी बर्फ़ का सीना चीरकर उगे चिनार के नीचे बैठकर आग का कोई गीत गाती स्त्री सदियों की बर्फ़ को पिघला रही है उसकी ज़िद, उसका साहस...
Ganesh Shankar Vidyarthi

धर्म की आड़

इस समय, देश में धर्म की धूम है। उत्‍पात किये जाते हैं, तो धर्म और ईमान के नाम पर और ज़िद की जाती है,...
Ibne Insha

सब माया है

सब माया है, सब ढलती-फिरती छाया है इस इश्क़ में हमने जो खोया, जो पाया है जो तुमने कहा है, 'फ़ैज़' ने जो फ़रमाया है सब माया...
Sandeep Nirbhay

चिलम में चिंगारी और चरखे पर सूत

मेरे बच्चो! अपना ख़याल रखना आधुनिकता की कुल्हाड़ी काट न दे तुम्हारी जड़ें जैसे मोबाइलों ने लोक-कथाओं और बातों के पीछे लगने वाले हँकारों को काट दिया है जड़ों सहित वर्तमान...
Kunwar Narayan

अबकी अगर लौटा तो

अबकी अगर लौटा तो बृहत्तर लौटूँगा चेहरे पर लगाए नोकदार मूँछें नहीं कमर में बाँधे लोहे की पूँछें नहीं जगह दूँगा साथ चल रहे लोगों को तरेरकर न देखूँगा...
Poonachi - Perumal Murugan

पेरुमल मुरुगन – ‘पूनाची’

पेरुमल मुरुगन के उपन्यास 'पूनाची' से उद्धरण | Quotes by Perumal Murugan from 'Poonachi'   "मैं इंसानों के बारे में लिखने के प्रति आशंकित रहता हूँ;...
Leeladhar Jagudi

अपने अन्दर से बाहर आ जाओ

हर चीज़ यहाँ किसी न किसी के अन्दर है हर भीतर जैसे बाहर के अन्दर है फैलकर भी सारा का सारा बाहर ब्रह्माण्ड के अन्दर है बाहर सुन्दर...
Dhoomil

पटकथा

जब मैं बाहर आया मेरे हाथों में एक कविता थी और दिमाग़ में आँतों का एक्स-रे। वह काला धब्बा कल तक एक शब्द था; ख़ून के अँधेर में दवा का ट्रेडमार्क बन गया...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Kedarnath Agarwal

हमारी ज़िन्दगी

हमारी ज़िन्दगी के दिन, बड़े संघर्ष के दिन हैं। हमेशा काम करते हैं, मगर कम दाम मिलते हैं। प्रतिक्षण हम बुरे शासन, बुरे शोषण से पिसते हैं। अपढ़, अज्ञान, अधिकारों से वंचित...
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