Tag: Pablo Neruda

The Book of Questions - Pablo Neruda

सवालों की किताब – IV

अनुवाद: पुनीत कुसुम कितने गिरिजाघर हैं स्वर्ग में? शार्क मछली क्यों नहीं करती आक्रमण निर्लज्ज जलपरियों पर? क्या धुंध करती है बातें बादलों से? क्या यह सच है कि...
Pablo Neruda

सवालों की किताब – III

अनुवाद: पुनीत कुसुम बताओ मुझे, क्या गुलाब नग्न है या यही उसकी एकमात्र पोशाक है? क्यों छिपाते हैं वृक्ष अपनी जड़ों का वैभव? कौन सुनता है चोर मोटरगाड़ियों के पछतावे? बारिश...
The Book of Questions - Pablo Neruda

सवालों की किताब – II

अनुवाद: पुनीत कुसुम यदि मैं मर गया हूँ और इस बात से अनजान हूँ तो वक़्त मैं पूछूँ किससे भला? फ्रांस में, बसन्त कहाँ से पा जाता है...
The Book of Questions - Pablo Neruda

सवालों की किताब – I

अनुवाद: पुनीत कुसुम बड़े-बड़े हवाई जहाज क्यों नहीं उड़ते लिए साथ अपने बच्चों को? कौन सी पीली चिड़िया अपना घोंसला भर लेती है नींबूओं से? वे हेलीकाप्टरों को क्यों...
The Book of Questions - Pablo Neruda

सवालों की किताब

अनुवाद: पुनीत कुसुमसवालों की किताब - Iसवालों की किताब - IIसवालों की किताब - IIIसवालों की किताब - IV

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कविता सरहदों के पार, हक़ीक़त के बीच दरार और कुछ बेतरतीब विचार

वरिष्ठ ताइवानी कवि एवं आलोचक ली मिन-युंग की कविताओं के हिन्दी अनुवाद का संकलन 'हक़ीक़त के बीच दरार' जुलाई में पाठकों तक पहुँचा। साहित्यिक...
Thaharti Sanson Ke Sirhane Se - Ananya Mukherjee

दुःख, दर्द और उम्मीद का मौसम (अनन्य मुखर्जी की कैंसर डायरी)

'ठहरती साँसों के सिरहाने से' अनन्या मुखर्जी की डायरी है जो उन्होंने 18 नवम्बर, 2018 को स्तन कैंसर से लड़ाई हार जाने से पहले...
Kantha - Shyam Bihari Shyamal

कंथा : जयशंकर प्रसाद के जीवन और युग पर केन्द्रित उपन्यास

मूर्धन्य साहित्यकार जयशंकर प्रसाद का साहित्य सर्वसुलभ है लेकिन उनके 'तुमुल कोलाहल' भरे जीवन की कहानी से दुनिया अब तक प्रायः अपरिचित रही है।...
Hungry, Poor

अहमद नियाज़ रज़्ज़ाक़ी की नज़्में

अब अब कहाँ है ज़बान की क़ीमत हर नज़र पुर-फ़रेब लगती है हर ज़ेहन शातिराना चाल चले धड़कनें झूठ बोलने पे तुलीं हाथ उठते हैं बेगुनाहों पर पाँव अब रौंदते...
Man lying on footpath, Homeless

तीन चित्र : स्वप्न, इनकार और फ़ुटपाथ पर लेटी दुनिया

1 हम मृत्यु-शैय्या पर लेटे-लेटे स्वप्न में ख़ुद को दौड़ता हुआ देख रहे हैंऔर हमें लगता है हम जी रहे हैं हम अपनी लकड़ियों में आग के...
Fair, Horse Ride, Toy

मेला

1 हर बार उस बड़ी चरखी पर जाता हूँ जो पेट में छुपी हुई मुस्कान चेहरे तक लाती है कई लोग साल-भर में इतना नहीं हँसते जितना खिलखिला लेते हैं...
Man holding train handle

आधुनिकता

मैं इक्कीसवीं सदी की आधुनिक सभ्यता का आदमी हूँ जो बर्बरता और जंगल पीछे छोड़ आया हैमैं सभ्य समाज में बेचता हूँ अपना सस्ता श्रम और दो वक़्त की...
Justyna Bargielska

यूस्टीना बारगिल्स्का की कविताएँ

1977 में जन्मीं, पोलिश कवयित्री व उपन्यासकार यूस्टीना बारगिल्स्का (Justyna Bargielska) के अब तक सात कविता संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और उन्हें दो...
Saadat Hasan Manto

ख़ुशिया

ख़ुशिया सोच रहा था।बनवारी से काले तम्बाकूवाला पान लेकर वह उसकी दुकान के साथ लगे उस संगीन चबूतरे पर बैठा था जो दिन के...
Naresh Mehta

घर की ओर

वह— जिसकी पीठ हमारी ओर है अपने घर की ओर मुँह किये जा रहा है जाने दो उसे अपने घर।हमारी ओर उसकी पीठ— ठीक ही तो है मुँह यदि होता तो...
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