Tag: Usama Hameed

Eye, Man, Window, Light, Stranger

कहानी के बाहर एक अजनबी

"मैं अपने बाप की लिखी किताबें नहीं पढ़ता। उनका ग़ज़लों का संग्रह मेरी टेबल पर धरा रहता है। महीनों बीत जाते हैं। फिर मैं उसकी गर्द साफ कर देता हूँ और वैसे ही सजा देता हूँ। मुझे शायरी, कविताएँ समझ नहीं आतीं। इन ग़ज़लों में उनकी उस महबूबा का ज़िक्र है जो मेरी माँ नहीं है। असल में वह कोई भी नहीं है। अगर फ्रायड की माने तो यह सारी ग़ज़लें बस उनकी वह ख्वाहिशें हैं जो मेरी माँ पूरी नहीं कर सकीं। लेकिन मेरी निगाह में यह सरलीकरण उचित नहीं हैं। लोगों को समझना कुछ इतना आसान नहीं है। लोग अजीब होते हैं।"
कॉपी नहीं, शेयर करें! ;)