Tag: Venu Gopal

Venu Gopal

काले भेड़िए के ख़िलाफ़

देखो कि जंगल आज भी उतना ही ख़ूबसूरत है। अपने आशावान हरेपन के साथ बरसात में झूमता हुआ। उस काले भेड़िए के बावजूद जो शिकार की टोह में झाड़ियों से निकलकर...
Abstract, Time

कहो तो

कहो तो 'इन्द्रधनुष' ख़ून-पसीने को बिना पोंछेदायीं ओर भूख से मरते लोगों का मटमैले आसमान-सा विराट चेहरा बायीं ओर लड़ाई की ललछौंही लपेट में दमकते दस-बीस साथीउभरकर आएगा ठीक तभी सन्नाटे...
Venu Gopal

मेरा वर्तमान

मैं फूल नहीं हो सका। बग़ीचों से घिरे रहने के बावजूद। उनकी हक़ीक़त जान लेने के बाद यह मुमकिन भी नहीं था। यों अनगिन फूल हैं वहाँ। लेकिन मुस्कुराता हुआ...
Hands, Touch

सृष्टि का पहला क्षण

मैंने दीवार को छुआ—वह दीवार ही रही। मौक़ा देखकर हिफ़ाज़त करती या रुकावट बनती। मैंने पेड़ को छुआ—वह पेड़ ही रहा। एक दिन ठूँठ बन जाने की...
Venu Gopal

कौन बचता है

जहाँ इस वक़्त कवि है कविता है, वहाँ जंगल है और अँधेरा है और हैं धोखेबाज़ दिशाएँ।दुश्मन सेनाओं से बचने की कोशिश में भटकते-भटकते वे यहाँ आ फँसे हैं, जहाँ से इस वक़्त न...
Venu Gopal

वे हाथ होते हैं

दुश्मनों की ख़ुशी पर मुझे कुछ नहीं कहना है। दोस्तों की उदासी ही मुझसे यह कविता लिखवा रही है।जिन अँधेरे रास्तों पर सफ़र शुरू हुआ था, वे एकाएक राज-पथ...
Bodies, Sensual, Intimacy, Tattoo, Flower, Back, Lesbian, Body, Touch

प्यार का वक़्त

वह या तो बीच का वक़्त होता है या पहले का। जब भी लड़ाई के दौरान साँस लेने का मौक़ा मिल जाए। उस वक़्तजब मैं तुम्हारी बन्द पलकें बेतहाशा चूम रहा...

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नेओमी शिहैब नाय (Naomi Shihab Nye) का जन्म सेंट लुइस, मिसौरी में हुआ था। उनके पिता एक फ़िलिस्तीनी शरणार्थी थे और उनकी माँ जर्मन...
Shehar Se Dus Kilometer - Nilesh Raghuwanshi

किताब अंश: ‘शहर से दस किलोमीटर’ – नीलेश रघुवंशी

'शहर से दस किलोमीटर' ही वह दुनिया बसती है जो शहरों की न कल्पना का हिस्सा है, न सपनों का। वह अपने दुखों, अपने...
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श्रीविलास सिंह की कविताएँ

सड़कें कहीं नहीं जातीं सड़कें कहीं नहीं जातीं वे बस करती हैं दूरियों के बीच सेतु का काम, दो बिंदुओं को जोड़तीं रेखाओं की तरह, फिर भी वे पहुँचा देती...
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गीतांजलि श्री – ‘रेत समाधि’

गीतांजलि श्री का उपन्यास 'रेत समाधि' हाल ही में इस साल के लिए दिए जाने वाले बुकर प्राइज़ के लिए चयनित अन्तिम छः किताबों...
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अनुवाद: पंखुरी सिन्हा युद्ध के बाद ज़िन्दगी कुछ चीज़ें कभी नहीं बदलतीं बग़ीचे की झाड़ियाँ हिलाती हैं अपनी दाढ़ियाँ बहस करते दार्शनिकों की तरह जबकि पैशन फ़्रूट की नारंगी मुठ्ठियाँ जा...
Javed Alam Khan

जावेद आलम ख़ान की कविताएँ

तुम देखना चांद तुम देखना चांद एक दिन कविताओं से उठा ज्वार अपने साथ बहा ले जाएगा दुनिया का तमाम बारूद सड़कों पर क़दमताल करते बच्चे हथियारों को दफ़न...
Shyam Bihari Shyamal - Sangita Paul - Kantha

श्यामबिहारी श्यामल जी के साथ संगीता पॉल की बातचीत

जयशंकर प्रसाद के जीवन पर केंद्रित उपन्यास 'कंथा' का साहित्यिक-जगत में व्यापक स्वागत हुआ है। लेखक श्यामबिहारी श्यामल से उपन्यास की रचना-प्रकिया, प्रसाद जी...
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