वो जो रूठें यूँ मनाना चाहिए
ज़िंदगी से रूठ जाना चाहिए

हिम्मत-ए-क़ातिल बढ़ाना चाहिए
ज़ेर-ए-ख़ंजर मुस्कुराना चाहिए

ज़िंदगी है नाम जोहद ओ जंग का
मौत क्या है भूल जाना चाहिए

है इन्हीं धोखों से दिल की ज़िंदगी
जो हसीं धोखा हो, खाना चाहिए

लज़्ज़तें हैं दुश्मन-ए-औज-ए-कमाल
कुल्फ़तों से जी लगाना चाहिए

उन से मिलने को तो क्या कहिए ‘जिगर’
ख़ुद से मिलने को ज़माना चाहिए

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जिगर मुरादाबादी
जिगर मुरादाबादी, एक और नाम: अली सिकंदर (1890–1960), 20 वीं सदी के सबसे प्रसिद्ध उर्दू कवि और उर्दू गजल के प्रमुख हस्ताक्षरों में से एक। उनकी अत्यधिक प्रशंसित कविता संग्रह "आतिश-ए-गुल" के लिए उन्हें 1958 में साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया।

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