गोपालशरण सिंह

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Nirmala Putul

बाहामुनी

तुम्हारे हाथों बने पत्तल पर भरते हैं पेट हज़ारों पर हज़ारों पत्तल भर नहीं पाते तुम्हारा पेट कैसी विडम्बना है कि ज़मीन पर बैठ बुनती हो चटाइयाँ और...
Nand Kishore Acharya

ओछा है मेरा प्यार

कितना अकेला कर देगा मेरा प्यार तुमको एक दिन अकेला और सन्तप्त अपनी समूची देह से मुझे सोचती हुईं तुम जब मुस्कुराओगी—औपचारिक! प्यार मैं तुम्हें तब भी करता रहूँगा शायद...
Om Prakash Valmiki

युग-चेतना

मैंने दुःख झेले सहे कष्‍ट पीढ़ी-दर-पीढ़ी इतने फिर भी देख नहीं पाए तुम मेरे उत्‍पीड़न को इसलिए युग समूचा लगता है पाखण्डी मुझको। इतिहास यहाँ नक़ली है मर्यादाएँ सब झूठी हत्‍यारों की रक्‍तरंजित...
Birds, Couple

‘चलो’—कहो एक बार

'चलो' कहो एक बार अभी ही चलूँगी मैं— एक बार कहो! सुना तब 'हज़ार बार चलो' सुना— आँखें नम हुईं और माथा उठ आया। बालू ही बालू में खुले पैर, बंधे हाथ चांदी की जाली...
Qurratulain Hyder

पतझड़ की आवाज़

अनुवाद: शम्भु यादव सुबह मैं गली के दरवाज़े में खड़ी सब्ज़ीवाले से गोभी की क़ीमत पर झगड़ रही थी। ऊपर रसोईघर में दाल-चावल उबालने के...
Faiz Ahmad Faiz

पास रहो

तुम मेरे पास रहो मेरे क़ातिल, मेरे दिलदार, मेरे पास रहो जिस घड़ी रात चले, आसमानों का लहू पी के सियह रात चले मरहम-ए-मुश्क लिए, नश्तर-ए-अल्मास लिए बैन करती हुई, हँसती...
Swayam Prakash

पिताजी का समय

अपने घर में मैं परम स्वतंत्र था। जैसे चाहे रहता, जो चाहे करता। मर्ज़ी आती जहाँ जूते फेंक देता, मन करता जहाँ कपड़े। जगह-जगह...
Neem Tree

तेरे वाला हरा

चकमक, जनवरी 2021 अंक से कविता: सुशील शुक्ल  नीम तेरी डाल अनोखी है लहर-लहर लहराए शोखी है नीम तेरे पत्ते बाँके हैं किसने तराशे किसने टाँके हैं नीम तेरे फूल बहुत झीने भीनी ख़ुशबू शक्ल से पश्मीने नीम...
Saadat Hasan Manto

चोर

मुझे बेशुमार लोगों का क़र्ज़ अदा करना था और ये सब शराबनोशी की बदौलत था। रात को जब मैं सोने के लिए चारपाई पर...
God, Abstract Human

होने की सुगन्ध

यही तो घर नहीं और भी रहता हूँ जहाँ-जहाँ जाता हूँ, रह जाता हूँ जहाँ-जहाँ से आता हूँ, कुछ रहना छोड़ आता हूँ जहाँ सदेह गया नहीं वहाँ...
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