“मैंने एक अनुभव किया है- जब भी मैं अलगाव की कोई भी बात पढ़ती हूँ तो उद्विग्न हो जाती हूँ। उस व्यक्ति से घृणा होने लगती है जिसने अलग होने की भूमि तैयार की है जबकि ऐसा आवश्यक नहीं कि वह गलत हो। प्रेम तो प्रेम है आखिर। पता नहीं। हो सकता है गलत भी हो। पर मेरी सोचने की क्षमता पर मेरी भावनाएँ हावी हो जाती हैं, जो कि सही नहीं है। प्रेम पर विश्वास रखते हुए मुझे यह शक्ति भी विकसित करनी होगी कि मैं सत्य को स्वीकार कर पाऊँ।”

“ओ येह, चित्रलेखे! ओ येह!”

” ही ही..।। अच्छा ठीक है ना। शट अप!!”


Shiva

अपने बारे में बताने को कुछ आकर्षक सा हो, इसका तो अभी इंतज़ार ही है।
एक परंपरागत भारतीय लड़की की छवि से ज़्यादा दूर नहीं हूँ। समाज की अनेक बातों से बेचैन, खुद को लेकर बहुत असुरक्षित, दिन में सपने देखती और रात में घर की छत को तकती रहती एक आम लड़की। हर तरह की किताबों से बहुत प्यार करती हूँ, तरह तरह से उन्हें अलमारी में सजाया करती हूँ, और एक ‘विश’ माँगने को बोला जाए तो यही चाहूँगी की हज़ारों किताबों का निचोड़ दिमाग़ में समा जाए।
अपनी असुरक्षाओं से लड़ने के लिए कुछ कुछ लिख लेती हूँ, और लोगों की सच्ची-झूठी तारीफों में सुकून पा लेती हूँ।
लिखने- पढ़ने के अलावा संगीत एक और ऐसी चीज़ है जो मैं कस के अपने पास रखे रहना चाहती हूँ।

  • Kabir Malik · July 15, 2016 at 6:48 pm

    कितना सुन्दर लिखते हैं आप। ओ ये!

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