कविता: ‘पहचान और परवरिश’ – प्रज्ञा मिश्रा

कौन है ये?
मेरी बिटिया है,
इनकी भतीजी है,
मट्टू की बहन है,
वी पी साहब की वाइफ हैं,
शर्मा जी की बहू है।

अपने बारे में भी बताइये भाभी जी।
टीनू की माँ हूँ
विक्की की चाची हूँ
टीकू की मामी हूँ
इसकी भी भाभी हूँ
उसकी मौसी हूँ।

नमस्ते मिस्टर वेद प्रकाश जी कैसे हैं सर
बस सब मज़े में।
अरे मिसेस शर्मा आप कहाँ गायब हैं?
कुछ नहीं बस बच्चे खा लें।

नाइस!

हेलो बेटा
क्या बात है …..पी एस पी!
किसने दिलाई
पापा ने!
दुष्ट लायी तो मैं थी ना
पापा खरीद के दिये
वाह कितना इंटेलीजेंट लड़का है!
देखो अभी से कितना समझता है

कूल बॉय!

दो बच्चे हैं?
जी बस एक साल का अंतर
ओह सिजेरियन
आजकल कहाँ उतना पहले सी हिम्मत औरतों मैं!

वाह बिटिया समझदार बड़ी लगती है
हाँ !लड़कियां जल्दी बड़ी हो जाती हैं!

टीलू देख भैया को पानी ला के दे
वीडियो गेम छोड़,
वो देखेगा ना तो मरेगा तुझे!
फिर मैं कुछ नही बोलूंगी
पापा खास उसके लिए लाए थे
टीलू जा देख के आ पापा को कुछ
चाहिये
तू प्यारी बिटिया है मेरी
माँ नींद आ रही है, अरे मेरा बेटा!
टीलू बेटा जरा पलंग ठीक कर देना
भाई सोएगा।

गुड गर्ल!

टीलू बेटा तुझे सुबह उठ के पढ़ना है
बाहर चली जाना
बच्चा है ना चिड चिड़ाएगा

गुड नाईट बच्चों
गुडनाइट मम्मी

बेटा क्या लिख रहे हो
माई फैमिली
वाह सबका नाम लिखा

बेटा मम्मी का नाम
“मम्मी”

हाऊ क्यूट!

कितने साल का है
अरे बस पांच
उफ्फ तुम भी ना मैं लिखा देती हूँ,

बेटा लिखो “लोपामुद्रा वेद प्रकाश शर्मा”

दीदी काय बोलती तुला नाव लोपामुद्रा आहे
मला मायेत नाई, खुप छान!

बेटा बड़े हुए अब ये सब खुद किया करो!
टीलू तू कर देगी ना मम्मी को मत बता।

ओके डन!

अच्छा बेटा सुन भाई को बाहर जाना है
स्कोलरशिप है,
सब काम में हेल्प कर फटाफट
पापा कहाँ हैं?
सीधा एयरपोर्ट आएंगे गोल्फ खेलने गए है।

कूल।

भाई?
ट्रीट दे रहा है पिज़्ज़ा विलेज में
बस यही तो दिन हैं उसके।

राइट मॉम!

कितनी प्यारी है
मेरी बहु है
बेटा यहाँ आओ
नमस्ते अंकल
बच्चे व्हाट्स योर नेम?
अरे राहुल!
कहाँ हो यार अपनी वाइफ को इंट्रोड्यूस कराओ

नो वेट!

अंकल आई एम तिलोत्तमा!

वाह तिलोत्तमा!

■■■

(प्रज्ञा मिश्रा सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ी एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में कार्यरत हैं। उनका हिन्दी के प्रति प्रेम उन्हें बिहार की मिट्टी और अपने घर के हिन्दीमय वातावरण से मिला, और इसके लिए प्रज्ञा अपने आपको धन्य मानती हैं। हिन्दी के प्रति समर्पित होने के पहले चरण में प्रज्ञा आजकल इग्नू से हिन्दी में एम. ए. कर रही हैं। प्रज्ञा से यहाँ जुड़ा जा सकता है और उनकी अन्य रचनाएँ उनके ब्लॉग ‘शतदल’ पर पढ़ी जा सकती हैं)

चित्र श्रेय: Frank Holleman


Posham Pa

भाषाओं को भावनाओं को आपस में खेलना पोषम-पा चाहिए खेलती हैं चिड़िया-उड़..।

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